महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाई गई राज्य सरकार की समिति से हाई कोर्ट के एक पूर्व जज के इस्तीफे के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस इस्तीफे को लेकर कई सवाल उठाए हैं और बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है।
Knews Desk– जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए महाराष्ट्र की UCC समिति के कामकाज पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि समिति से हाई कोर्ट के एक पूर्व जज का इस्तीफा कई अहम सवाल पैदा करता है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें देश का हर राज्य अपनी अलग समान नागरिक संहिता तैयार करे। जयराम रमेश ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ऐसा नहीं था।
उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में बीजेपी शासित राज्यों ने UCC के अपने-अपने संस्करण पारित किए हैं। उनके मुताबिक, उत्तराखंड में UCC 27 जनवरी 2025 से लागू हुआ। इसके बाद गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026, असम विधानसभा ने 27 मई 2026 और मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को UCC विधेयक पारित किया।
जयराम रमेश ने कहा कि इन राज्य स्तरीय UCC में कई समानताएं नहीं हैं और इनमें अलग-अलग प्रावधान, दंड, प्रक्रियाएं और महत्वपूर्ण छूट शामिल हैं। उन्होंने उत्तराखंड के UCC को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को जारी रखता है और कानून का पालन करने वाले लोगों के लिए भी कई तरह की समस्याएं पैदा कर रहा है।
जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी राज्यों में UCC लागू करने की बात कही गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC को व्यापक विचार-विमर्श और सार्वजनिक बहस के जरिए अधिकतम संभव सहमति के साथ लागू किए जाने वाले कानूनी सुधार के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि UCC का इस्तेमाल विभाजन, व्यवधान और लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह लोगों को परेशान और डराने, पूर्वाग्रहों को भड़काने तथा समाज को लंबे समय तक ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने का माध्यम बन रहा है।