‘वीर नारी’ पॉलिसी के तहत भारतीय वायुसेना में दोबारा शामिल होने की मांग कर रहीं पूर्व स्क्वाड्रन लीडर प्रियंका सक्सेना को फिलहाल राहत नहीं मिली है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रक्षा मंत्री ने उन्हें दोबारा सेवा में शामिल होने के लिए उम्र में छूट देने से इनकार कर दिया है।
Knews Desk– पूर्व भारतीय वायुसेना अधिकारी प्रियंका सक्सेना से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को अहम जानकारी दी है। सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि रक्षा मंत्री ने प्रियंका सक्सेना को वायुसेना में दोबारा शामिल होने के लिए उम्र में छूट देने से इनकार कर दिया है। केंद्र का कहना है कि वह ‘वीर नारी’ पॉलिसी के दायरे में नहीं आती हैं।
प्रियंका सक्सेना पूर्व स्क्वाड्रन लीडर हैं और उन्होंने भारतीय वायुसेना में करीब 10 साल तक सेवा दी है। विधवा होने के बाद उन्होंने ‘वीर नारी’ पॉलिसी के तहत दोबारा वायुसेना में शामिल होने के लिए उम्र में छूट की मांग की थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ASG ऐश्वर्या भाटी से अदालत की सहायता करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि इस मामले को किसी मिसाल के तौर पर स्थापित नहीं किया जाएगा। ASG ने अदालत को बताया कि अगर प्रियंका सक्सेना को दोबारा सेवा में शामिल किया जाता है, तो उन्हें रिफ्रेशर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ सकता है और संभव है कि उन्हें अपनी पिछली सीनियरिटी भी छोड़नी पड़े।
अदालत ने ट्रेनिंग से जुड़ी संभावित परिस्थितियों पर भी चर्चा की। जस्टिस मोहना ने कहा कि यदि दोबारा नियुक्ति ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने की शर्त पर निर्भर रहती है और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भी वह उसे सफलतापूर्वक पूरा नहीं कर पाती हैं, तो यह एक समस्या पैदा कर सकती है।
ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि इस मामले में सरकार दोबारा अदालत का रुख कर सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रियंका सक्सेना को वर्ष 2013 में रिटायर किया गया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आदेश पर विचार किया जा सकता है।
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री जारी करने की विशेष शक्ति देता है।
‘वीर नारी’ पॉलिसी भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय की ऐसी नीति है, जिसका उद्देश्य देश के लिए जान गंवाने वाले सैन्यकर्मियों की पत्नियों यानी वीर नारियों के सम्मान, पुनर्वास और कल्याण से जुड़े मामलों में सहायता प्रदान करना है।