knews desk – मामला एनसीईआरटी की कक्षा-1 की हिंदी पुस्तक ‘सारंगी भाग-01’ में शामिल ‘चंदा मामा दूर के’ कविता से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि कविता की दूसरी पंक्ति में सही शब्द की जगह कथित तौर पर एक गलत और अमर्यादित शब्द छप गया। याचिका में दावा किया गया है कि वहां सही शब्द ‘गुड़’ होना चाहिए था, लेकिन उसकी जगह आपत्तिजनक शब्द प्रकाशित हो गया।
याचिकाकर्ता ने इसे बच्चों की पाठ्यपुस्तक में गंभीर त्रुटि बताते हुए सवाल उठाया है कि प्रकाशन से पहले किताब की जांच और प्रूफरीडिंग प्रक्रिया में यह गलती कैसे रह गई। उनका कहना है कि पुस्तक प्रकाशित होने के बाद भी लंबे समय तक इसमें सुधार नहीं किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता सोमित्र शंकर ने 21 जुलाई 2026 को पटना के कदमकुआं स्थित ज्ञान गंगा बुक डिपो से यह पुस्तक खरीदी थी। पुस्तक में कथित शब्द की मौजूदगी का सत्यापन करने के बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट में लोकहित याचिका दायर की।
याचिका पर पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शोवेन्द्र कुमार ने अदालत के सामने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
‘चंदा मामा दूर के’ बच्चों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय बाल कविता रही है। पहली कक्षा की पाठ्यपुस्तक में शामिल इस कविता को लेकर सामने आए विवाद ने बच्चों के लिए प्रकाशित होने वाली किताबों की गुणवत्ता जांच और प्रूफरीडिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कक्षा-1 की किताबें बच्चों के शुरुआती भाषा विकास और पढ़ने की आदत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में पाठ्यपुस्तक में किसी भी तरह की मुद्रण या संपादकीय त्रुटि सामने आने पर उसकी जांच और समय पर सुधार जरूरी माना जाता है। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि पुस्तक में गलती थी, तो उसे ठीक करने के लिए संशोधित संस्करण क्यों नहीं जारी किया गया।
हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने अभी यह अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि कथित आपत्तिजनक शब्द पुस्तक में किस स्तर पर और किस कारण से आया। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अब संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।