जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बड़ा झटका, 2025 में सिर्फ एक स्थानीय युवक बना आतंकी

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में सुरक्षा स्थिति में सुधार का दावा, पत्थरबाजी और हिंसा में कमी के बीच LoC पर सीजफायर उल्लंघन बढ़े

Knews Desk- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है. रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सिर्फ एक स्थानीय युवक आतंकी संगठन में शामिल हुआ. वहीं, पत्थरबाजी की घटनाएं पूरी तरह बंद होने और हिंसा में कमी से सुरक्षा माहौल में सुधार के संकेत मिले हैं. हालांकि, LoC पर बढ़े सीजफायर उल्लंघन और सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें अब भी चुनौती बनी हुई हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना के लगातार प्रयासों से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति कुल मिलाकर नियंत्रण में है. स्थानीय लोग विकास योजनाओं और सरकार की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. इसका सकारात्मक असर क्षेत्र के सुरक्षा माहौल पर भी पड़ा है.

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि हिंसा के स्तर में गिरावट आई है और विरोध प्रदर्शनों में भी कमी दर्ज की गई है. इसके अलावा, पत्थरबाजी की घटनाएं शून्य हो गई हैं.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद LoC पर बदले हालात

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर और LoC पर सुरक्षा स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला. 10 और 12 मई 2025 को DGsMO स्तर की बातचीत के बाद हालात काफी हद तक स्थिर हुए. हालांकि, सीमा पर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है और सुरक्षा बल लगातार सतर्क हैं.

सुरक्षा में सुधार का असर जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र पर भी पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में करीब 2.3 करोड़ पर्यटक जम्मू-कश्मीर पहुंचे. इसी दौरान श्री अमरनाथ यात्रा में 4.13 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बावजूद पर्यटकों का सुरक्षा बलों पर भरोसा कायम रहा और बड़ी संख्या में लोग जम्मू-कश्मीर घूमने पहुंचे.

LoC पर सीजफायर उल्लंघन में बड़ा इजाफा

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, LoC पर 2024 में सिर्फ 2 सीजफायर उल्लंघन हुए थे. यह संख्या 2025 में बढ़कर 163 हो गई. इनमें से 124 घटनाएं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दर्ज की गईं.

LoC पर सीजफायर उल्लंघन के आंकड़े:

  • 2019: 3,233
  • 2020: 4,645
  • 2021: 594
  • 2022: 1
  • 2023: 0
  • 2024: 2
  • 2025: 163

घुसपैठ की कोशिशों में कमी, IB पर बढ़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में आतंकवादियों ने घुसपैठ की 6 कोशिशें कीं. LoC पर घुसपैठ की कोशिशों के दौरान सुरक्षा बलों ने 12 पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया.

भारतीय सेना के आकलन के मुताबिक, पिछले वर्षों की तुलना में LoC पर घुसपैठ की कोशिशों में कमी आई है. हालांकि, आतंकियों की गतिविधियां अब इंटरनेशनल बॉर्डर यानी IB सेक्टर की ओर बढ़ने का आकलन है. इस दौरान नशीले पदार्थों और युद्ध से जुड़े सामान की तस्करी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है.

स्थानीय युवाओं की आतंकी भर्ती में ऐतिहासिक गिरावट

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में स्थानीय युवाओं की भर्ती में आई कमी को माना जा रहा है. रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में 146 स्थानीय युवक आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे. 2022 में यह आंकड़ा 121 रहा.

इसके बाद स्थानीय भर्ती में लगातार गिरावट दर्ज की गई. 2023 में 19, 2024 में 4 और 2025 में सिर्फ एक स्थानीय युवक आतंकी संगठन से जुड़ा.

स्थानीय आतंकी भर्ती के आंकड़े:

  • 2021: 146
  • 2022: 121
  • 2023: 19
  • 2024: 4
  • 2025: 1

रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय युवाओं का हिंसा से दूर होकर सरकारी योजनाओं और विकास के अवसरों की ओर बढ़ना आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण बदलाव है. 2025 में सिर्फ एक स्थानीय युवक की भर्ती को पाकिस्तान के उस दावे के लिए झटका माना गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद को स्थानीय समर्थन से जुड़ा हुआ बताया जाता है.

2025 में 19 आतंकी मारे गए, 8 पाकिस्तानी

जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा बलों के काउंटर-टेरर ऑपरेशन जारी रहे. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ऐसे अभियानों के दौरान 19 आतंकवादियों को मार गिराया गया. इनमें 8 पाकिस्तानी आतंकी थे.

कुल मारे गए आतंकियों में पाकिस्तानी आतंकियों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रही. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह आंकड़ा जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका को भी दर्शाता है.

स्थानीय समर्थन में कमी, सीमा पार खतरा कायम

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट से साफ है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय स्तर पर आतंकवाद के लिए समर्थन और भर्ती में भारी कमी आई है. पत्थरबाजी की घटनाओं का खत्म होना और पर्यटन में बढ़ोतरी सुरक्षा स्थिति में सुधार के संकेत हैं.

हालांकि, पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों की मौजूदगी, घुसपैठ की कोशिशें और LoC पर बढ़े सीजफायर उल्लंघन अब भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए हैं. ऐसे में जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में स्थिति नियंत्रण में होने के बावजूद सीमा पर भारतीय सेना की सतर्कता लगातार जारी है.

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