KNEWS DESK – ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने कैश-ऑन-डिलीवरी यानी COD ऑर्डर पर एक नई फीस शुरू की है। शनिवार को कंपनी के ऐप पर कुछ यूजर्स के लिए यह चार्ज दिखाई दिया। ऑर्डर बिल में इसे “पे ऑन डिलीवरी फीस” के नाम से दिखाया जा रहा है।
यह फीस उन ग्राहकों से ली जा रही है, जो डिलीवरी के समय अपने खाने का भुगतान कैश में करना चुनते हैं। खास बात यह है कि यह चार्ज सभी यूजर्स और ऑर्डर्स के लिए एक जैसा नहीं है। इसकी रकम ऑर्डर की वैल्यू और यूजर के हिसाब से अलग-अलग दिखाई दे रही है।
फीस तय करने का आधार साफ नहीं
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जोमैटो इस फीस को किन आधारों पर तय कर रहा है। क्या यह ऑर्डर की कीमत, ग्राहक की लोकेशन, पेमेंट हिस्ट्री या किसी अन्य पैरामीटर पर निर्भर है, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
इस मामले पर जोमैटो की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं, प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म स्विगी फिलहाल कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर पर अलग से कोई फीस नहीं ले रहा है।
जोमैटो पहले से ही फूड ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस वसूलता है। इसके अलावा ऑर्डर के अनुसार डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग फीस और अन्य शुल्क भी बिल में जोड़े जाते हैं।
छोटे चार्ज से बड़ी कमाई
ऐसे छोटे चार्ज का असर कंपनी की कमाई पर बड़े स्तर पर दिखाई दे सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जोमैटो रोजाना लगभग 23 से 25 लाख फूड ऑर्डर प्रोसेस करता है।
अगर हर ऑर्डर पर 5 रुपये का चार्ज लगाया जाए, तो सैद्धांतिक तौर पर कंपनी की रोजाना अतिरिक्त कमाई 1.15 करोड़ से 1.25 करोड़ रुपये तक हो सकती है। सालाना आधार पर यह रकम करीब 420 से 456 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमानित अधिकतम सीमा है, क्योंकि सभी ग्राहक कैश-ऑन-डिलीवरी का विकल्प नहीं चुनते। फिर भी इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बड़े ऑर्डर वॉल्यूम वाले प्लेटफॉर्म के लिए छोटे-छोटे चार्ज कितने अहम हो सकते हैं।
2023 में शुरू हुई थी प्लेटफॉर्म फीस
फूड डिलीवरी कंपनियों ने प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत 2023 में की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में स्विगी ने 2 रुपये का प्लेटफॉर्म चार्ज आजमाया था। इसके बाद जोमैटो ने भी यह फीस लागू की।
समय के साथ यह चार्ज बढ़ता गया। इस साल की शुरुआत में जोमैटो की प्लेटफॉर्म फीस 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर कर दी गई थी। इस पर GST अलग से लागू होता है।
प्लेटफॉर्म फीस से हजारों करोड़ की कमाई
एक रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियां प्लेटफॉर्म फीस के जरिए सालाना 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये तक कमा सकती हैं।
कंपनियों के लिए यह मॉडल इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि खाने या डिलीवरी की मुख्य कीमत बढ़ाने के बजाय चेकआउट के समय छोटे-छोटे शुल्क जोड़े जाते हैं। अब COD फीस के जरिए पेमेंट के तरीके से भी अतिरिक्त कमाई की कोशिश की जा रही है।
इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। कैश में भुगतान करने वाले यूजर्स को खाने की कीमत के अलावा प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग फीस, टैक्स और अब पे ऑन डिलीवरी फीस भी चुकानी पड़ सकती है।