KNEWS DESK- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर की करीब 2000 साल पुरानी कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह किताब भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। तिरुक्कुरल को तमिल भाषा की महानतम शास्त्रीय रचनाओं में गिना जाता है। इसका सटीक रचनाकाल निश्चित नहीं है, लेकिन इसे लगभग दो हजार साल पुरानी ज्ञान परंपरा से जोड़ा जाता है।
तिरुक्कुरल में क्या है खास?
तिरुक्कुरल में जीवन, समाज, शासन, नैतिकता, प्रेम और मानवीय व्यवहार से जुड़े गहरे विचार मिलते हैं। पूरी कृति में 133 अध्याय और 1330 दोहे हैं। हर अध्याय में 10 दोहे शामिल हैं। इसकी खासियत यह है कि बेहद छोटे-छोटे दोहों के जरिए जीवन और समाज से जुड़े बड़े संदेश दिए गए हैं।
इस कृति को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है—अरम, पोरुल और इनबम।
अरम: अच्छा जीवन कैसे जिएं?
तिरुक्कुरल का पहला हिस्सा ‘अरम’ है। इसमें नैतिकता, सदाचार और सही आचरण पर जोर दिया गया है। सत्य, दया, आत्मसंयम, अच्छा व्यवहार और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों को इसमें प्रमुखता दी गई है।
अरम का मूल संदेश है कि व्यक्ति को अपने जीवन में अच्छे चरित्र और मानवीय मूल्यों को अपनाना चाहिए। करीब दो हजार साल पहले लिखी गई यह कृति आज भी लोगों को एक अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा देती है।
पोरुल: शासन और नेतृत्व की सीख
दूसरे हिस्से को ‘पोरुल’ कहा जाता है। इसमें राजा, शासन, प्रशासन, न्याय, मंत्री, सेना, कूटनीति, मित्र और दुश्मन जैसे विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
तिरुवल्लुवर ने जिम्मेदार नेतृत्व और अच्छे शासन की कसौटियों पर विस्तार से बात की। यही वजह है कि तिरुक्कुरल को सिर्फ साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक चिंतन का महत्वपूर्ण दस्तावेज भी माना जाता है।
इनबम: प्रेम और मानवीय भावनाएं
तीसरा हिस्सा ‘इनबम’ है, जिसमें प्रेम और मानवीय भावनाओं का वर्णन मिलता है। इसमें रिश्तों, भावनाओं और प्रेम से जुड़े अनुभवों को जगह दी गई है।
इस तरह एक ही कृति में व्यक्ति का चरित्र, समाज की व्यवस्था, शासन की नीति और इंसानी भावनाएं एक साथ दिखाई देती हैं।
65 भाषाओं में हो चुका है अनुवाद
तिरुक्कुरल की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है। केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान के मुताबिक, इसका 65 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और यह छह महाद्वीपों तक पहुंच चुका है। वर्ष 2026 में इसका रूसी अनुवाद भी सामने आया।
पुतिन को तिरुक्कुरल भेंट कर पीएम मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विविधता का संदेश दिया। यह कृति उत्तर भारत के बजाय दक्षिण भारत की तमिल ज्ञान परंपरा से जुड़ी है। ऐसे में यह उपहार भारत और रूस के बीच रणनीतिक रिश्तों के साथ-साथ सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती को भी दर्शाता है।