KNEWS DESK- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं। भारत में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन के दौरान पेजेश्कियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इस बैठक में चाबहार पोर्ट, तेल-गैस, व्यापार, कनेक्टिविटी और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत रवाना होने से पहले तेहरान में राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने BRICS की भूमिका और आर्थिक सहयोग को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि BRICS के पास एकतरफावाद का मुकाबला करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की व्यापक क्षमता है। उन्होंने आर्थिक लेन-देन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
BRICS को बताया बहुपक्षवाद का मजबूत मंच
पेजेश्कियान ने BRICS के 18वें शिखर सम्मेलन को बहुपक्षवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह बैठक सदस्य देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने में मदद कर सकती है।
ईरानी राष्ट्रपति के मुताबिक, BRICS में 21 सदस्य हैं। इनमें 11 मुख्य सदस्य और 10 नए सदस्य शामिल हैं, जिन्हें BRICS PLUS के नाम से जाना जाता है। यह समूह दुनिया की 45 प्रतिशत से अधिक आबादी और करीब 35 प्रतिशत भू-भाग का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
डॉलर पर निर्भरता घटाने पर जोर
पेजेश्कियान ने कहा कि BRICS का एक प्रमुख उद्देश्य एकतरफावाद का मुकाबला करना है। इसके तहत सदस्य देशों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने BRICS बैंक का जिक्र करते हुए कहा कि वित्तीय और मौद्रिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार की गई है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच निवेश और संयुक्त आर्थिक गतिविधियों को आसान बनाना है।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि BRICS देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और आर्थिक विकास के लिए नए विकल्प तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक वित्तीय तंत्रों को बढ़ावा देने से सदस्य देशों को बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के दबाव से निपटने में मदद मिल सकती है।

चाबहार पोर्ट पर हो सकती है अहम बातचीत
भारत और ईरान के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक में चाबहार पोर्ट प्रमुख मुद्दा रह सकता है। भारत ने ईरान के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल में निवेश किया है। चाबहार पोर्ट के जरिए भारत पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपनी पहुंच मजबूत कर सकता है।
इसके अलावा चाबहार को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC से जोड़ने की योजना भी अहम है। इससे भारत की रूस और यूरोप तक कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।
तेल और LPG सप्लाई पर भी नजर
ऊर्जा सहयोग भी भारत-ईरान वार्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। ईरान भारत को ज्यादा कच्चा तेल और LPG सप्लाई करने में रुचि दिखा रहा है। भारत के लिए ईरान से ऊर्जा आयात बढ़ाना सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, ईरानी तेल की खरीद पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की स्थिति अहम भूमिका निभाएगी। दोनों देश व्यापार बढ़ाने, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन और BRICS के वित्तीय तंत्र के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा कर सकते हैं।
फिलहाल किसी बड़ी डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी चाबहार पोर्ट, ऊर्जा सहयोग, व्यापार, INSTC और वित्तीय संबंधों को लेकर बैठक से ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है। पश्चिम एशिया के हालात, होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय शांति जैसे मुद्दे भी बातचीत में शामिल हो सकते हैं।