knews desk – धर्मनगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण को लेकर खड़े हनुमान मंदिर का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. प्रशासन और विशेषज्ञों की तमाम कोशिशों के बावजूद मंदिर में स्थापित करीब 170 साल पुरानी हनुमान जी की प्रतिमा को अब तक हटाया नहीं जा सका है. इसी बीच मंदिर के आसपास अचानक बड़ी संख्या में बंदरों के पहुंचने का मामला सामने आया है.
कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर मार्ग पर स्थित मंदिर के आसपास बंदरों की मौजूदगी के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. इसके बाद स्थानीय श्रद्धालु और दूर-दराज से दर्शन के लिए पहुंच रहे लोग इसे भगवान श्रीराम और हनुमान जी की कृपा से जोड़कर देख रहे हैं.
मंदिर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ
मंदिर परिसर के आसपास लगातार श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं. इसी बीच बड़ी संख्या में बंदरों के पहुंचने से लोगों के बीच कौतूहल बढ़ गया है.
मौके पर मौजूद कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि जब मशीनों और इंसानी ताकत से हनुमान जी की प्रतिमा को नहीं हटाया जा सका, तो अब मानो स्वयं ‘वानर सेना’ अपने प्रभु के स्थान की रक्षा करने पहुंच गई है. हालांकि, यह श्रद्धालुओं की आस्था और व्यक्तिगत विश्वास से जुड़ी धारणा है.
धार्मिक जानकारों ने क्या कहा?
धार्मिक जानकारों के मुताबिक, मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास बंदरों का आना स्वाभाविक भी हो सकता है. ऐसे में इसे सीधे चमत्कार मानना वैज्ञानिक तथ्य नहीं है. हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में श्रद्धालु इसे अपनी आस्था और बजरंगबली के प्रति विश्वास से जोड़कर देख रहे हैं.
‘डॉक्टर हनुमान’ के नाम से प्रसिद्ध है मंदिर
उज्जैन का यह ऐतिहासिक खड़े हनुमान मंदिर भक्तों के बीच ‘डॉक्टर हनुमान’ के नाम से भी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है. इसी आस्था के चलते मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
फिलहाल एक तरफ नगर निगम और IIT इंदौर की टीम प्रतिमा और मंदिर की स्थिति को लेकर तकनीकी जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बंदरों की मौजूदगी ने पूरे मामले को श्रद्धालुओं के बीच और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है.
देशभर से दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बाद से मंदिर को लेकर लोगों की आस्था और मजबूत हुई है. गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र और अयोध्या समेत कई जगहों से श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की बात सामने आई है. भक्तों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने के पक्ष में नहीं हैं.
30 अगस्त से शुरू हुआ था विवाद
खड़े हनुमान मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने की प्रक्रिया 30 अगस्त को शुरू हुई थी. इसके बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने विरोध किया और चक्काजाम की स्थिति भी बनी.
4 सितंबर को मंदिर का शिखर हटाया गया. इसके बाद 7 सितंबर को IIT इंदौर की एक्सपर्ट टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रतिमा की स्कैनिंग की. 9 सितंबर को प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा. 10 सितंबर को IIT की टीम एक बार फिर मौके पर पहुंची और तकनीकी जांच की. हालांकि, अब तक हनुमान जी की प्रतिमा को हटाया नहीं जा सका है.