नासिक के कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुंबई की विशेष अदालत ने ED के सबूतों के आधार पर उसके और पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता माना है.
Knews desk- नासिक के कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात के खिलाफ दर्ज मामलों की फेहरिस्त लगातार बढ़ रही है. अब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी मुंबई की विशेष अदालत ने उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मिलने की बात कही है. अदालत ने अशोक खरात समेत छह आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश दिया है. सभी आरोपियों को 22 सितंबर को अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है.
अदालत के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर जबरन वसूली और आपराधिक धमकी जैसे अनुसूचित अपराधों से हासिल रकम का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने और उसके लेन-देन में किया. कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि आरोपियों के पास बड़ी मात्रा में संपत्ति होने के प्रथम दृष्टया संकेत मिले हैं.
कोर्ट ने यह भी माना कि कथित अपराधों में एक समान तरीका बार-बार अपनाया गया. इससे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि अपराध से हासिल रकम यानी Proceeds of Crime को व्यवस्थित तरीके से जुटाया गया था, न कि यह सिर्फ किसी एक घटना तक सीमित मामला था.
अदालत ने अशोक कुमार खरात, उसकी पत्नी कल्पना खरात, अरविंद बावके, नामकरण आवारे, अविनाश कांडेक और मिलिंद बंकर के खिलाफ प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है. सभी छह आरोपियों को 22 सितंबर को कोर्ट में पेश होना होगा.
ED ने जबरन वसूली, गलत तरीके से बंधक बनाने और आपराधिक धमकी से संबंधित एक FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. इस FIR में महाराष्ट्र के अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत भी धाराएं लगाई गई थीं. जांच के दौरान ED ने कथित अपराध से हासिल रकम और उससे जुड़े संपत्ति लेन-देन की पड़ताल की.
कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, अशोक कुमार खरात पर शिकायतकर्ताओं से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित जबरन वसूली का आरोप है. आरोप है कि वह खुद को भगवान कृष्ण का अवतार बताकर लोगों से पैसे ऐंठता था. खरात 20 मई 2026 से जेल में है.
मामले में उस पर शिरडी के एक किसान को उसकी जमीन वास्तविक कीमत से काफी कम रकम में बेचने के लिए कथित तौर पर मजबूर करने का आरोप भी है. इस जमीन सौदे को लेकर भी जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की है.
ED का आरोप है कि मामले के अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी संपत्ति सौदों को अंजाम देने और उन्हें सुविधाजनक बनाने में भूमिका निभाई. फिलहाल अदालत के प्रथम दृष्टया निष्कर्ष के बाद सभी छह आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. मामले में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत के निर्देशों के आधार पर होगी.