KNEWS DESK- संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को कड़ी नसीहत देते हुए अपनी मां से माफी मांगने को कहा। कोर्ट ने कहा कि बेटे को अपनी मां के पास जाकर उनके पैर छूने चाहिए और अपने किए के लिए माफी मांगकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। मामले में माता-पिता ने अपने बेटे और बहू पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए संपत्ति पर मालिकाना हक जताने और उन्हें परेशान करने का आरोप लगाया था।
माता-पिता ने बेटे-बहू पर लगाए गंभीर आरोप
मामला एक ऐसी संपत्ति से जुड़ा है, जिसकी एकमात्र मालिकाना हक माता-पिता के पास थी। उन्होंने अपने बेटे और बहू को बिना किराए के लाइसेंसी के तौर पर संपत्ति की पहली मंजिल पर रहने की अनुमति दी थी। आरोप है कि बाद में बेटे और बहू ने माता-पिता पर संपत्ति को अपने नाम करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
माता-पिता का यह भी आरोप था कि बेटे और बहू ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति पर अपना अधिकार जताने की कोशिश की। विवाद बढ़ने के बाद माता-पिता ने अखबार में सार्वजनिक सूचना जारी कर बेटे और बहू से संबंध खत्म करने की घोषणा की। साथ ही बेटे के खिलाफ FIR दर्ज कराई और लाइसेंस रद्द करते हुए उन्हें संपत्ति खाली करने का नोटिस दिया।
इसके बाद माता-पिता ने संपत्ति का कब्जा वापस पाने, स्थायी रोक लगाने और नुकसान की भरपाई की मांग को लेकर अदालत का रुख किया।
ट्रायल कोर्ट के बाद दिल्ली हाईकोर्ट भी माता-पिता के पक्ष में
मामले की सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट ने माना कि संपत्ति के एकमात्र मालिक माता-पिता हैं, जबकि बेटा और उसकी पत्नी केवल लाइसेंसी के तौर पर वहां रह रहे थे। अदालत ने माना कि उनका लाइसेंस उचित तरीके से रद्द किया गया है और इसलिए उन्हें संपत्ति की पहली मंजिल खाली करनी होगी।
बाद में मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। 17 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद बेटे ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बेटे की याचिका खारिज कर दी और उसे अपनी मां से माफी मांगने की नसीहत दी।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि बेटे को अपनी मां के पास जाना चाहिए, उनके पैर छूकर अपने किए के लिए माफी मांगनी चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
जज ने कोर्ट में मौजूद एक वकील एडवोकेट मनदीप कालरा से भी पूछा कि क्या बेटे का अपनी मां के साथ ऐसा व्यवहार करना गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि कोर्ट बेटे से यही कह रहा है कि वह अपनी मां के पास वापस जाए, उनके पैर छुए, माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति विवाद पर कानूनी फैसला सुनाने के साथ-साथ मां-बेटे के रिश्ते और माता-पिता के सम्मान को लेकर भी बेटे को भावनात्मक संदेश दिया।