KNEWS DESK-कान्हा जी की छठी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है. इस मौके पर घरों में बाल गोपाल के लिए तरह-तरह के पकवान और सात्विक व्यंजन तैयार किए जाते हैं. अगर आप भी छठी के भोग के लिए कुछ स्वादिष्ट और आसान बनाना चाहती हैं, तो बिना लहसुन-प्याज वाली कढ़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है.

दही और बेसन से तैयार होने वाली यह कढ़ी स्वाद में हल्की खट्टी और बेहद स्वादिष्ट होती है. खास बात यह है कि इसमें लहसुन और प्याज की जरूरत नहीं पड़ती. जीरा, राई, हींग, करी पत्ते और सूखी लाल मिर्च का तड़का इसके स्वाद और खुशबू को और बढ़ा देता है. इसे चावल, पूरी या रोटी के साथ परोसा जा सकता है.
सात्विक कढ़ी बनाने के लिए सामग्री
- 1 कप दही
- 3 बड़े चम्मच बेसन
- 3 कप पानी
- आधा छोटा चम्मच हल्दी
- आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- स्वादानुसार नमक
- 3 चम्मच घी
- आधा छोटा चम्मच जीरा
- आधा छोटा चम्मच राई
- 1 चुटकी हींग
- 2 सूखी लाल मिर्च
- 8-10 करी पत्ते
- थोड़ा हरा धनिया
ऐसे तैयार करें कढ़ी
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दही और बेसन डालकर अच्छी तरह फेंट लें. अब इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए मिश्रण को लगातार चलाएं. इससे बेसन की गुठलियां नहीं बनेंगी और कढ़ी का घोल एकदम स्मूद रहेगा.
अब इसमें हल्दी और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. घोल को बहुत ज्यादा गाढ़ा न रखें, क्योंकि पकने के बाद कढ़ी की कंसिस्टेंसी अपने आप गाढ़ी हो जाती है.
एक गहरी कड़ाही में दही-बेसन का घोल डालकर धीमी आंच पर पकाएं. शुरुआती कुछ मिनट तक इसे लगातार चलाते रहें. जब कढ़ी में उबाल आने लगे तो आंच और धीमी कर दें और करीब 15 मिनट तक पकने दें. बीच-बीच में इसे चलाते रहें. जब बेसन की कच्ची खुशबू खत्म हो जाए, तो गैस बंद कर दें.
तड़के से बढ़ाएं स्वाद
अब तड़का तैयार करने के लिए छोटी कड़ाही में घी गर्म करें. इसमें जीरा और राई डालें. जब दोनों चटकने लगें तो सूखी लाल मिर्च, करी पत्ते और एक चुटकी हींग डाल दें. तैयार तड़के को तुरंत कढ़ी में डालें और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डाल दें. कुछ देर के लिए कढ़ी को ढककर रखें, ताकि तड़के की खुशबू अच्छी तरह उसमें घुल जाए.
कान्हा जी की छठी पर ऐसे करें सर्व
सात्विक कढ़ी को गर्मागर्म चावल, पूरी या रोटी के साथ परोसा जा सकता है. भोग के लिए बनाते समय अपने घर की पूजा-पद्धति और परंपरा के अनुसार सामग्री का चयन करें. दही ज्यादा खट्टा हो तो उसकी मात्रा थोड़ी कम रखी जा सकती है, ताकि कढ़ी का स्वाद संतुलित रहे. धीमी आंच पर कढ़ी को अच्छी तरह पकाना भी जरूरी है. इससे बेसन की कच्ची महक निकल जाती है और कढ़ी का स्वाद ज्यादा अच्छा आता है.