मां-बहन के साथ खेलने की जिद, दोनों ने मना किया तो 11 साल के बच्चे ने उठाया खौफनाक कदम

KNews Desk: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है. यहां 11 साल के चौथी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे ने कथित तौर पर छत पर फांसी लगाकर जान दे दी. बताया जा रहा है कि बच्चा अपनी मां और बहन के साथ छत पर खेलना चाहता था, लेकिन दोनों के व्यस्त होने के कारण उसके साथ नहीं जा सकीं. इसके बाद बच्चा नाराज होकर अकेले छत पर चला गया.

मामला थाना मझोला क्षेत्र की रामतलैया चौकी का है. मृतक बच्चा मूल रूप से उत्तराखंड के चंपावत जिले का रहने वाला था. परिवार पिछले करीब 20 वर्षों से मुरादाबाद में किराए के मकान में रह रहा है. बच्चे के पिता कपड़े की दुकान पर काम करते हैं.

पहले बहन को बुलाया, फिर मां से की जिद

परिजनों के मुताबिक, रात करीब 9 बजे बच्चा छत पर खेलने गया था. उस समय उसकी बहन भी उसके साथ थी. कुछ देर बाद बहन स्कूल का होमवर्क पूरा करने के लिए नीचे कमरे में चली गई. बच्चे ने उसे दोबारा छत पर बुलाया, लेकिन पढ़ाई पूरी करने की वजह से उसने आने से मना कर दिया.

इसके बाद बच्चा नीचे आया और अपनी मां को भी छत पर साथ चलने के लिए कहा. मां उस समय घरेलू काम में व्यस्त थीं. उन्होंने बच्चे से कुछ देर बाद आने की बात कही. बताया जा रहा है कि इसी बात से बच्चा नाराज हो गया और वापस अकेले छत पर चला गया.

दो घंटे बाद छत पर पहुंची मां तो उड़ गए होश

रात करीब 11 बजे जब मां बेटे को बुलाने के लिए छत पर पहुंचीं, तो उन्होंने उसे फंदे से लटका हुआ देखा. बेटे को इस हालत में देखकर मां की चीख निकल गई. आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और रस्सी काटकर बच्चे को नीचे उतारा.

परिजन बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

कम ऊंचाई को लेकर भी उठे सवाल

घटना की सूचना मिलने के बाद मझोला थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची. घटनास्थल की जांच के दौरान छत की दीवार और रस्सी की ऊंचाई को लेकर कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ऊंचाई काफी कम थी और ऐसे में बच्चे ने फंदा कैसे लगाया, इसे लेकर संशय जताया गया है.

पुलिस ने बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. फिलहाल परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है. पुलिस फॉरेंसिक साक्ष्यों और जांच के अन्य पहलुओं के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है, ताकि बच्चे की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके.

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