रागिनी की पढ़ाई की ललक देख पिघला सिस्टम, CM योगी ने उठाया इलाज का जिम्मा

KNews Desk: बलिया की सात वर्षीय रागिनी की पढ़ाई के प्रति लगन आखिरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई। एक पैर के सहारे कूदते-कूदते स्कूल जाने वाली रागिनी ने 31 अगस्त को बलिया के डीएम मंगला प्रसाद सिंह से स्कूल जाने के लिए साइकिल की मांग की थी। उसकी भावुक अपील सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया। अब प्रदेश सरकार रागिनी के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी।

विकासखंड मनियर की ग्राम पंचायत रानीपुर गांव निवासी देवेंद्र राजभर की बेटी रागिनी दिघेड़ा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा है। उसके घर से स्कूल की दूरी करीब 400 मीटर है, लेकिन एक पैर के सहारे चलने वाली रागिनी के लिए यह रास्ता बेहद मुश्किल था। स्कूल जाते समय उसे कई बार थककर रास्ते में बैठना पड़ता था। दर्द अधिक होने पर वह रोने भी लगती थी।

डीएम से मांगी थी साइकिल

31 अगस्त को रागिनी ने डीएम मंगला प्रसाद सिंह से अपनी परेशानी बताते हुए साइकिल की मांग की थी। उसने कहा था कि उसका एक पैर खराब है और वह पढ़ना चाहती है। रागिनी की मासूम अपील सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। बुधवार को डीएम मंगला प्रसाद सिंह रागिनी के गांव पहुंचे और उसे एक नहीं, बल्कि दो ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराईं। इसके अलावा बच्ची को जरूरत का सामान भी दिया गया। ट्राइसाइकिल मिलने के बाद रागिनी ने मासूमियत से कहा कि अब उसे और कुछ नहीं चाहिए।

जिला अस्पताल में हुआ मेडिकल परीक्षण

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गुरुवार को रागिनी का जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. करण सिंह चौहान ने सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय की मौजूदगी में बच्ची के पैर की जांच की। चिकित्सकों ने बताया कि रागिनी को कुछ विशेष जांचों की जरूरत है, जिनकी सुविधा जिला स्तर पर उपलब्ध नहीं है।

इसके बाद परिवार की सहमति से रागिनी को बेहतर उपचार और विशेषज्ञ जांच के लिए वाराणसी स्थित बीएचयू अस्पताल भेजने का निर्णय लिया गया। शनिवार को रागिनी को उसकी मां बबीता देवी के साथ वाराणसी ले जाया जाएगा।

ऑपरेशन या अन्य उपचार से ठीक करने की कोशिश

डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि प्रशासन का प्रयास है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय के आधार पर रागिनी के पैर का ऑपरेशन या अन्य उचित उपचार कराया जा सके। उसके इलाज में आने वाला पूरा खर्च प्रदेश सरकार वहन करेगी। सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय के अनुसार, बचपन में रागिनी के पैर में फ्रैक्चर हुआ था। पैर की हड्डी घुटने से सही तरीके से जुड़ नहीं सकी। समय के साथ मांसपेशियां कमजोर होती गईं और पैर का पंजा भी झुक गया। अब बीएचयू में होने वाली विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह तय होगा कि रागिनी के पैर को किस तरह ठीक किया जा सकता है।

रागिनी की कहानी ने यह दिखाया है कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद पढ़ने की उसकी ललक कम नहीं हुई। अब मुख्यमंत्री के निर्देश और सरकारी मदद से उसके बेहतर इलाज और पढ़ाई की राह आसान होने की उम्मीद है।

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