कटक की खराब सड़कों और बार-बार उभर रहे गड्ढों को लेकर ओडिशा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने कहा कि सड़क महज तारकोल और पत्थरों से बनी संरचना नहीं, बल्कि लोगों की आवाजाही, सुरक्षा और जीवन से जुड़ी बुनियादी जरूरत है.
Knews Desk- बारिश के साथ सड़कों पर गड्ढे, उनमें भरता पानी और मरम्मत के कुछ समय बाद फिर वही स्थिति… कटक में सड़कों की बदहाली को लेकर लंबे समय से चली आ रही इस समस्या पर अब ओडिशा हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने कहा कि खराब सड़कें लोगों के सुरक्षित आवागमन को प्रभावित करती हैं और इन्हें केवल एक निर्माण संबंधी समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
यह मामला कटक की सड़कों की खराब स्थिति को लेकर हाई कोर्ट की स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्यवाही से जुड़ा है. जस्टिस केआर महापात्र और जस्टिस वी. नरसिंह की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 2024 से लगातार निर्देश दिए जाने के बावजूद सड़कों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ.
2024 से अदालत की निगरानी में मामला
कटक की बदहाल सड़कों को लेकर हाई कोर्ट ने सितंबर 2024 में अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया था. 12 सितंबर 2024 के आदेश में शहर के 15 वार्डों की खराब सड़कों की मरम्मत कराने और इसकी प्रगति रिपोर्ट अदालत के सामने रखने को कहा गया था.
इसके बाद अक्टूबर 2024 में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी अदालत के सामने उठी. सड़कों पर पानी जमा होने से पहले से खराब सड़कें और ज्यादा खतरनाक हो गईं. हाई कोर्ट ने कटक नगर निगम के आयुक्त को जलभराव दूर करने और जरूरी मरम्मत कराने के निर्देश दिए.
अधिकारियों ने बाद की सुनवाई में बताया कि कई सड़कों के लिए अनुमान तैयार किए जा चुके हैं और निर्माण कार्यों को तकनीकी मंजूरी के लिए भेजा गया है. हालांकि, अदालत ने कहा कि कागजों पर चल रही प्रक्रिया का असर सड़कों की वास्तविक स्थिति में नजर नहीं आ रहा है.
सिर्फ हलफनामा दाखिल करना काफी नहीं
हाई कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामों पर भी सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि बार-बार आदेश और आश्वासन देने के बावजूद यदि सड़कें लोगों के लिए सुरक्षित और इस्तेमाल लायक नहीं बन पा रही हैं तो केवल रिपोर्ट दाखिल करने का कोई मतलब नहीं है.
अदालत ने प्रशासन से ठोस सुधार योजना, काम पूरा करने की समयसीमा और अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुधार का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए.
प्रशासन ने क्या बताया?
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी ने अदालत को बताया कि कटक में सड़कों की मरम्मत और निर्माण के लिए व्यापक योजना तैयार की जा रही है. जलभराव की समस्या के समाधान के लिए डीपीआर तैयार किए जाने की बात भी कही गई.
वहीं, नगर निगम की ओर से कुछ इलाकों में काम जारी होने और करीब 70 फीसदी मुख्य सड़कों के अच्छी स्थिति में होने का दावा किया गया. हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दावे पर सवाल उठाए. अब वार्ड स्तर पर अधिवक्ता समितियां सड़कों का निरीक्षण करेंगी और अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करेंगी.
अनुच्छेद 19(1)(d) और 21 का क्या है कनेक्शन?
इस मामले में हाई कोर्ट की टिप्पणी का एक अहम पहलू संविधान के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है. अनुच्छेद 19(1)(d) नागरिकों को देश के पूरे क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा की गारंटी देता है.
इसी संदर्भ में अदालत ने सड़क को सिर्फ तारकोल और पत्थरों से बनी संरचना मानने के बजाय लोगों के आवागमन, सुरक्षा और जीवन से जुड़ी लाइफलाइन बताया. कोर्ट की टिप्पणी का सीधा संदेश है कि नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और बार-बार खराब होती सड़कों की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.