उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बिसात बिछने लगी है, राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के प्रदेश दौरे हो रहे है। इसी बीच हालही में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का हल्द्वानी दौरा इन दिनों सियासी विवाद का केंद्र बन गया है। दरअसल, 8 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे खड़गे ने पहले दिन प्रदेश के हल्द्वानी में जनसभा को संबोधित किया। जिसके बाद आरोप है कि 12 अगस्त को कथित हिंदू संगठन श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के कार्यकर्ताओं ने उसी ग्राउंड पर हवन कर शुद्धिकरण कर दिया। हिंदू संगठन की माने तो रैली के दौरान गलत नारो का उपयोग किया गया, जिसके लिए शुद्धिकरण किया गया। इस सबके बाद प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया और इसकी गूंज संसद तक भी सुनाई दी। बीते शनिवार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेसवार्ता कर इस मुद्दे को उठाया और भाजपा पर भेदभाव का आरोप लगाया। कांग्रेस ने इसे भाजपा की तुष्टिकरण और भेदभाव की राजनीति करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि हवन करने वाले भाजपा से जुड़े हैं, इसलिए दोषियों पर कार्रवाई और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। इस मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेशभर में उपवास व प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं इस मामले ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। श्रीराम सेना ने राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है,जिसमें जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। इसके बाद हल्द्वानी कोतवाली में राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दूसरी ओर भाजपा ने इस शुद्धिकरण से किनारा कर लिया है, भाजपा का कहना है, कि कांग्रेस 2027 चुनाव को देखते हुए भ्रम फैला रही है। जिसके चलते दलों के बीच जुबानी जंग देखी जा रही है।
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण मामले में अब नया मोड़ आ गया है। राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी गई है। श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से यह तहरीर दी गई है। तहरीर देने वालों में विनोद आर्य और अमित कुमार शामिल हैं। दोनों ही रामलीला मैदान में शुद्धिकरण करने वाले न्यास के सदस्य बताए जा रहे हैं। तहरीर में अनुसूचित जाति के विरुद्ध जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है. शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से मामले की जांच कर राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। रविवार की शाम कांग्रेस ने इसी मैदान में मौन प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया। बारिश के बावजूद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे और घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।जिस पर भाजपा पूरे मामले पर अपने आपको निर्दोष बता रही है,और वही कांग्रेस भाजपा को साजिश कर्ता प्रदेश भर में भाजपा के खिलाफ कड़ा विरोध भी साफ तौर पर देखा जा रहा है।
कुलमिलाकर, कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे की रैली के बाद ग्राउंड में हुए शुद्धिकरण के बाद उत्तराखंड की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। एक तरफ कांग्रेस इस पूरे मामले को दलित सम्मान और सामाजिक भेदभाव से जोड़कर भाजपा पर हमलावर है, तो दूसरी तरफ भाजपा खुद को इस विवाद से अलग बताते हुए कांग्रेस पर ही चुनावी भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है। इस मामले ने अब सिर्फ सियासी रूप नहीं बल्कि कानूनी रूप भी ले लिया है। जहां कांग्रेस दोषियों पर कार्रवाई और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ मुकदमे की मांग कर रही है, वहीं श्रीराम सेना ने राहुल गांधी के खिलाफ ही तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करा दिया है। जाहिर है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ये मुद्दा दोनों दलों के लिए सियासी हथियार बन गया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या ये वाकई सामाजिक भेदभाव का मामला है या सिर्फ वोट बैंक की राजनीति, इसका जवाब आने वाले समय में जांच और जनता दोनों तय करेंगे।