नोएडा मजदूर आंदोलन हिंसा केस में हिमांशु ठाकुर को हाईकोर्ट से राहत, मिली जमानत

Noida Workers’ Protest: नोएडा में 15 अप्रैल को हुए मजदूर आंदोलन के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में आरोपी हिमांशु ठाकुर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी मंजूर करते हुए रिहाई का आदेश दिया है. अदालत ने कहा कि मामले में उनकी कोई स्पष्ट और व्यक्तिगत भूमिका सामने नहीं आती है.

KNews Desk: नोएडा के मजदूर आंदोलन से जुड़े हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी हिमांशु ठाकुर को जमानत दे दी है. हिमांशु ठाकुर मजदूर संगठन ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ से जुड़े कार्यकर्ता और छात्र हैं. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की एकल पीठ ने की. कोर्ट के आदेश के बाद अब उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है.

मामला नोएडा के फेज-2 थाना क्षेत्र और आसपास के औद्योगिक इलाकों का है. 15 अप्रैल को कई कंपनियों के मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए और भीड़ ने कथित तौर पर पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की. इस दौरान वाहनों, औद्योगिक परिसरों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी.

बताया गया कि घटना के वक्त मौके पर करीब 450 से 500 लोगों की भीड़ मौजूद थी. हिंसा के बाद पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की.

17 अप्रैल को हुई थी हिमांशु की गिरफ्तारी

हिंसा के मामले में पुलिस ने हिमांशु ठाकुर को 17 अप्रैल को गिरफ्तार किया था. इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और 19 अप्रैल को जेल भेज दिया गया. पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया था कि हिमांशु सोशल मीडिया के माध्यम से भीड़ को उकसाने और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने में शामिल थे.

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हिमांशु ठाकुर की ओर से उनके वकील ने कहा कि उन्हें मामले में केवल संदेह के आधार पर आरोपी बनाया गया है. बचाव पक्ष का तर्क था कि एफआईआर और गवाहों के बयानों में हिमांशु की हिंसा या तोड़फोड़ में कोई स्पष्ट प्रत्यक्ष भूमिका सामने नहीं आती.

वकील ने यह भी कहा कि किसी मजदूर संगठन से जुड़े होने मात्र से किसी व्यक्ति को हिंसा का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. घटना के दौरान मौके पर उनकी मौजूदगी और हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का ठोस प्रमाण भी सामने नहीं आया है.

हाईकोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत?

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के साथ केस डायरी का भी अवलोकन किया. कोर्ट ने पाया कि बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ से जुड़े इस मामले में हिमांशु ठाकुर की कोई स्पष्ट व्यक्तिगत या विशिष्ट भूमिका निर्धारित नहीं की गई है.

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली. कोर्ट ने व्यक्तिगत मुचलका और दो जमानतदार पेश करने की शर्त पर उन्हें जमानत दी है. साथ ही उन्हें जांच में सहयोग करने और गवाहों को किसी भी तरह प्रभावित नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *