KNEWS DESK- हिंदू ज्योतिष में पंचक को एक विशेष अवधि माना गया है. मान्यता है कि जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि के कुछ विशेष नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तब पंचक की अवधि बनती है. पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है. वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में पूजा-पाठ, दान और सेवा के जरिए नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है.
अगस्त 2026 का पंचक 27 अगस्त को दोपहर 1:35 बजे से शुरू होकर 1 सितंबर की सुबह 3:24 बजे तक रहेगा. ऐसे में पंचक के बचे हुए दिनों में कुछ आसान धार्मिक उपाय किए जा सकते हैं.
पंचक में कौन से उपाय करें?
भगवान शिव की आराधना करें
पंचक के दौरान भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है. घर के पूजा स्थल या शिव मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करने की मान्यता है. इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है.
जरूरतमंदों को दान करें
पंचक के दौरान दान-पुण्य को विशेष महत्व दिया जाता है. अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, घी, तेल, वस्त्र, कंबल या अन्य उपयोगी सामग्री जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर सकते हैं.
पक्षियों और पशुओं को भोजन कराएं
जीव-जंतुओं की सेवा को भी पुण्यकारी माना जाता है. पंचक के दौरान पक्षियों को दाना डालें और कुत्तों को रोटी या भोजन खिलाएं. इससे सेवा और दान दोनों का भाव पूरा होता है.
शनिवार को राहु से जुड़े उपाय करें
अगर पंचक के दौरान शनिवार पड़ता है, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काले तिल, सरसों का तेल, नीले वस्त्र या लोहे की वस्तु का दान किया जा सकता है. इसे राहु के अशुभ प्रभाव को शांत करने से जोड़कर देखा जाता है.
जरूरी यात्रा से पहले करें हनुमान जी की पूजा
यदि पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करना जरूरी हो, तो यात्रा से पहले हनुमान जी की पूजा करने और भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है. इसके बाद यात्रा शुरू करने की मान्यता है.
पंचक में किन कामों से बचने की मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान लकड़ी इकट्ठा करना, दक्षिण दिशा की यात्रा, घर की छत से जुड़ा काम और कुछ विशेष निर्माण कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. हालांकि, जरूरी परिस्थितियों में ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार उपाय किए जाते हैं.
पंचक को लेकर जरूरी बात
पंचक से जुड़े नियम और उपाय धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं. इनका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसलिए इन्हें आस्था और परंपरा के नजरिए से ही देखना चाहिए. जरूरी या आपातकालीन काम को केवल पंचक के डर से टालना उचित नहीं है.