उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, अपनी आध्यात्मिकता के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, और इसकी गरिमा व संस्कृति को बरकरार रखने के लिए धामी सरकार लगातार मुखर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल के साढ़े पांच साल पूरे हो चुके हैं, इस दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक और कड़े फैसले लिए जिनकी गूंज देश-विदेश तक सुनाई दी। इसी कड़ी में मदरसा बोर्ड को भंग करने का फैसला बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन की दिशा में काम कर रही है, जिसके तहत मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी अन्य शिक्षण संस्थानों की तरह टाइम-टेबल के अनुसार सभी विषयों की शिक्षा दी जा रही है। धामी सरकार का स्पष्ट कहना है. कि राज्य की डेमोग्राफी से खिलवाड़ और देवभूमि की मूल पहचान व जनसंख्या संतुलन से कोई समझौता नहीं होगा। अवैध मदरसे हों या अतिक्रमण, हर मोर्चे पर सख्त कार्रवाई जारी है। वही सत्ता पक्ष फैसलों की सराहना कर रहा है, लेकिन कुछ तत्व विरोध कर रहे हैं। दरअसल, हाल ही में उधमसिंह नगर के रुद्रपुर में जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान एक मुफ्ती द्वारा सरकार को चेतावनी देने व भड़काऊ भाषण का वीडियो वायरल हो रहा है। इस पर सीएम धामी ने सख्त रुख अपनाया है, सीएम धामी के अनुसार सरकार धमकियों से नहीं डरेगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। वहीं कांग्रेस ने भी मदरसा बोर्ड भंग करने के फैसले को ध्रुवीकरण बताते हुए प्रैक्टिकल पहलुओं की अनदेखी का आरोप लगाया है. और मदरसा संचालकों से कानूनी रास्ता अपनाने की नसीहत दी है। इसके साथ ही कांग्रेस ने मदरसा बोर्ड खत्म करने के फैसले को आनन फानन में लिया गया फैसला बताया है। जिसके चलते आपसी बयानबाज़ी चरम पर देखी जा रही है।
रुद्रपुर में जुलूस ए मोहम्मदी के दौरान एक मुफ़्ती ने मदरसों को लेकर धामी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है।मुफ्ती ने साफ कहा कि यदि मदरसे बंद किए तो देखना कि हम क्या हाल करेंगे। मुफ्ती ने नगर निगम द्वारा ईदगाह के पास वाली 8 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को लेकर भी सवाल खड़ा किया। मुफ्ती का यह बयान वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। भाजपा के मेयर विकास शर्मा ने मुफ्ती के इस बयान को भड़काऊ और माहौल खराब करने वाला बताया है वही पुलिस ने मुफ्ती के खिलाफ मुकदमा कायम कर लिया है।गुरुवार को जुलूस ए मोहम्मद था।इस दौरान रुद्रपुर त्रिशूल चौक पर जुलूस के दौरान एक मुफ़्ती ने मदरसों पर सरकारी कार्यवाही को लेकर धमकी दे दी। मुफ्ती ने कहा कि मदरसों के बारे में आप फैसला मत करो। याद रखना, अगर मदरसे बंद कर दिए तो फिर देखना आप, हम क्या हाल करेंगे।जिस पर मदरसों को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा ने कहा आतंकी और दंगाई पैदा करने वाले अवैध मदरसों बंद ही नहीं बल्कि नेस्तनाबूद होंगे।कांग्रेस ने मदरसा बोर्ड खत्म करने के फैसले को आनन फानन में लिया गया फैसला बताया है।
कुल मिलाकर, देवभूमि की अस्मिता और डेमोग्राफी को सुरक्षित रखने के लिए धामी सरकार के फैसले एक तरफ सख्त संदेश दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ सियासी घमासान भी तेज हो गया है। सरकार का स्टैंड क्लियर है कि वह किसी भी दबाव या धमकी में नहीं आएगी और अवैध मदरसे व अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा सके। वहीं कांग्रेस इसे चुनावी ध्रुवीकरण करार दे रही है।अब देखना होगा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद जमीनी स्तर पर कितना बदलाव आता है। दूसरी ओर भड़काऊ भाषण देने वाले मौलवी ने खुद को सिरेन्डर कर दिया है लेकिन वायरल वीडियो पर सरकार किस तरह की कानूनी कार्रवाई करती है यह भी देखने वाली बात होगी। फिलहाल देवभूमि की गरिमा बनाम तुष्टिकरण की सियासत के बीच उत्तराखंड की राजनीति में यह मुद्दा सबसे बड़ा बना हुआ है।