Knews Desk– अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मेटास्टैटिक पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज के लिए रिवोल्यूशन मेडिसिन्स की नई दवा ‘रासोंक’ को मंजूरी दे दी है। कंपनी के मुताबिक, क्लिनिकल ट्रायल में इस दवा ने एडवांस्ड स्टेज के मरीजों की जीवित रहने की अवधि को मौजूदा उपचार की तुलना में लगभग दोगुना किया।
यह दवा दिन में एक बार गोली के रूप में ली जाती है। इसे खासतौर पर उन मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनका पहले इलाज हो चुका है या जो कीमोथेरेपी नहीं ले सकते। पैंक्रियाटिक कैंसर के आरएएस-ड्रिवन मामलों के इलाज में इसे एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
हालांकि, दवा की कीमत काफी ज्यादा है। अमेरिका में इसकी 30 दिनों की सप्लाई की कीमत 39,800 डॉलर तय की गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 38 लाख रुपये बैठती है। कंपनी ने ऊंची कीमत के बावजूद मरीजों की मदद के लिए वित्तीय सहायता कार्यक्रम शुरू करने की बात कही है।
कैलिफोर्निया की 88 वर्षीय बारबरा एंडेस ने करीब एक साल तक कीमोथेरेपी लेने के बाद जुलाई में यह दवा शुरू की। उनका कहना है कि दवा लेने के बाद वह रोजमर्रा के कई काम दोबारा करने में सक्षम हुईं। उन्होंने यह भी बताया कि मतली और थकान जैसी परेशानियों में कमी महसूस हुई।
रासोंक को FDA की तेज समीक्षा प्रक्रिया के तहत मंजूरी मिली है। इस प्रक्रिया के जरिए दवाओं की समीक्षा का समय सामान्य प्रक्रिया की तुलना में काफी कम किया जा सकता है। रिवोल्यूशन मेडिसिन्स के सीईओ मार्क गोल्डस्मिथ ने कहा कि यह मंजूरी पैंक्रियाटिक कैंसर और खासतौर पर आरएएस से जुड़े कैंसर के खिलाफ लंबे समय से चल रहे शोध की बड़ी उपलब्धि है।
दवा की मंजूरी का असर कंपनी के कारोबार पर भी दिखाई दे सकता है। RBC कैपिटल मार्केट्स के विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका में तीसरी तिमाही के दौरान इस दवा से करीब 28 मिलियन डॉलर की बिक्री हो सकती है। चौथी तिमाही में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 148 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
लंबी अवधि में विश्लेषकों का अनुमान है कि रासोंक की वैश्विक सालाना बिक्री 11.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। अमेरिका में पैंक्रियाटिक कैंसर के मामलों की संख्या भी बड़ी है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुमान के मुताबिक, 2026 में करीब 67,350 लोगों में इस बीमारी का पता चल सकता है।