KNEWS DESK- रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी स्नेह का त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। लेकिन कई बार दूरी, व्यस्तता या किसी अन्य वजह से सगी बहन भाई के पास नहीं पहुंच पाती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाई की कलाई पर राखी बांधने की परंपरा अधूरी रह जाती है?
धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं में ऐसी स्थिति के लिए कोई एक कठोर नियम नहीं बताया जाता। कई परिवारों में सगी बहन की अनुपस्थिति में अन्य महिला रिश्तेदार प्रेम और शुभकामना के भाव से रक्षा सूत्र बांधती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य रिश्ते में प्रेम, विश्वास और मंगलकामना की भावना को बनाए रखना होता है।
चचेरी, ममेरी और फुफेरी बहन बांध सकती हैं राखी
अगर सगी बहन रक्षाबंधन पर मौजूद नहीं है, तो चचेरी, ममेरी या फुफेरी बहन भाई की कलाई पर राखी बांध सकती है। इन रिश्तों में भी भाई-बहन जैसा स्नेह और पारिवारिक जुड़ाव होता है। कई परिवारों में इस तरह राखी बांधने की परंपरा पहले से चली आ रही है।
बेटी या भतीजी भी बांध सकती है राखी
कुछ घरों में बेटी या भतीजी अपने पिता, चाचा, ताऊ या परिवार के अन्य सदस्यों को राखी बांधती हैं। अगर सगी बहन मौजूद नहीं हो, तो बेटी या भतीजी भी प्रेमपूर्वक रक्षा सूत्र बांध सकती है। यहां रिश्ते से ज्यादा महत्व राखी के पीछे छिपी शुभकामना और स्नेह की भावना का माना जाता है।
मां बांध सकती हैं रक्षा सूत्र
रक्षाबंधन पारंपरिक रूप से भाई-बहन का पर्व है, लेकिन कुछ परिवारों में मां भी बेटे की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं। मां अपने बेटे की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना के साथ यह परंपरा निभा सकती हैं। इसे कई परिवार स्नेह और आशीर्वाद के रूप में देखते हैं।
बुआ और भाभी भी निभा सकती हैं परंपरा
कई परिवारों में बुआ और भतीजे का रिश्ता बेहद खास माना जाता है। ऐसे में बुआ अपने भतीजे को राखी बांध सकती हैं। वहीं कुछ घरों में भाभी द्वारा देवर की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा भी देखने को मिलती है। हालांकि यह परिवार की अपनी मान्यता और परंपरा पर निर्भर करता है।
राखी के पीछे भावना सबसे महत्वपूर्ण
रक्षाबंधन में राखी का धागा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की खुशहाली की कामना का प्रतीक माना जाता है। इसलिए अगर सगी बहन किसी कारण से भाई के पास नहीं पहुंच पाती, तो परिवार की कोई अन्य महिला रिश्तेदार रक्षा सूत्र बांधकर इस भावना को कायम रख सकती है।
हालांकि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में रक्षाबंधन की परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी रिश्तेदार के राखी बांधने को लेकर अंतिम रूप से परिवार की मान्यता और स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।