चीनी की कीमतों पर सरकार का बड़ा कदम, 10 लाख टन कच्ची चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात

KNEWS DESK- देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। यह फैसला त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।

हालांकि, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है। संगठन के मुताबिक मौजूदा स्टॉक घरेलू और त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और हालिया तेजी के पीछे मुख्य वजह सट्टेबाजी और जमाखोरी है।

एक महीने में तेजी से बढ़े दाम

चीनी की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों में तेज उछाल देखने को मिला है। सरकार के इस कदम का मकसद बाजार में अतिरिक्त सप्लाई उपलब्ध कराकर कीमतों को स्थिर करना है। चीनी की मांग अगस्त से नवंबर के बीच बढ़ जाती है, क्योंकि इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार होते हैं। सरकार ने सिर्फ आयात का फैसला ही नहीं किया है, बल्कि जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की है। थोक उपभोक्ताओं को 1 सितंबर से अपनी 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

करीब एक दशक बाद चीनी का आयात

10 लाख टन कच्ची चीनी का यह आयात करीब एक दशक में पहली बार हो रहा है। आयात के लिए आवेदन 21 से 28 अगस्त तक किए जा सकते हैं। सरकार ने उन मिलों और रिफाइनरियों को प्राथमिकता देने की बात कही है, जो 15 अक्टूबर तक आयात पूरा करने का भरोसा देंगी। फिलहाल ब्राजील भारत के लिए चीनी आयात का प्रमुख विकल्प माना जा रहा है। ब्राजील से भारत तक खेप पहुंचने में करीब 40-45 दिन लग सकते हैं। ऐसे में आयातित चीनी का बड़ा असर अक्टूबर के आसपास घरेलू बाजार में दिखाई देने की संभावना है।

क्या देश में सच में चीनी खत्म हो रही है?

ISMA के मुताबिक ऐसा नहीं है। संगठन का कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और त्योहारी मांग को पूरा करने में फिलहाल कोई बड़ी परेशानी नहीं है। उद्योग संगठन को उम्मीद है कि सरकार के कदमों और जमाखोरी पर नियंत्रण के बाद चीनी की कीमतों में जल्द नरमी आ सकती है।

यानी सरकार का 10 लाख टन आयात का फैसला चीनी खत्म होने की वजह से नहीं, बल्कि कीमतों और बाजार की धारणा को नियंत्रित करने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

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