उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, देश और प्रदेश में बढ़ती महंगाई को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी खाद्य सामग्री, पेट्रोल,गैस, बिजली, पानी के बढ़ते दामों को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर नज़र आ रहा है। मुख्य तौर पर वर्तमान में चीनी समेत कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी आम आदमी की जेब पर बढ़ता बोझ नज़र आ रही है। इसके चलते विपक्ष का आरोप है कि महंगाई लगातार घरेलू बजट को प्रभावित कर रही है और सरकार कीमतों पर नियंत्रण करने में नाकाम साबित हो रही है। वहीं इसके साथ ही पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से कुछ वाहनों की माइलेज, इंजन की परफॉर्मेंस और रखरखाव पर असर पड़ रहा है। हालांकि, इन दावों को लेकर वाहन कंपनियों और विशेषज्ञों की राय वाहन और ईंधन मिश्रण के मानकों के आधार पर अलग अलग हो सकती है। लेकिन उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महंगाई का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता जा रहा है। विपक्ष लगातार सरकार से महंगाई पर लगाम लगाने और आम जनता को राहत देने की मांग कर रहा है तो वही सत्ता पक्ष मामले में सफाई देता नज़र आ रहा है। इस बीच आपसी बयानबाजी चरम पर देखी जा रही है।
देश और प्रदेश में बढ़ती महंगाई को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। खास्तौर पर उत्तराखंड में क्योंकि आगमी वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने है तो महंगाई एक बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है वही विपक्ष लगातार सरकार के खिलाफ सड़को पर उतरता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में बीते शनिवार देश में तेल और चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर राजधानी देहरादून में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया है। कांग्रेस का कहना है कि पूरे देश में चीनी की बढ़ती कीमत और एथेनॉल मिलावटी तेल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। देश के नागरिकों की गाड़ियां खराब कर रहा है, और इथेनॉल नीति के तहत पूरे देश में गन्ने की कमी है, जो शुगर मिलें झेल रही हैं। चीनी की कीमत पिछले एक महीने के अंदर तीस रुपये तक बढ़ गई है और आम लोगों की थाली से अब मिठास भी गायब होती जा रही है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इसी प्रकार की स्तिथि रही तो पूरे प्रदेश के हर शहर, जिले, कस्बे में चीनी की बढ़ती कीमतें और मिलावटी पेट्रोल को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। वही बढ़ती महंगाई को लेकर सत्ता पक्ष अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण खराब हालात का हवाला देता नज़र आ रहा है। जिसके चलते राजनीति चरम पर देखी जा रही है।
कुलमिलाकर महंगाई का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस का केंद्र बन गया है। बढ़ती महंगाई को विपक्ष सरकार की नाकामी बता रहा है तो सत्ता पक्ष इसे वैश्विक परिस्थितियों का असर बता रही है। भाजपा का कहना है कि दुनिया युद्ध और असामान्य हालातों से गुजर रही है, इसलिए दामों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सरकार ने देश में न तो किसी चीज की कमी होने दी और न ही कीमतों को बेकाबू होने दिया। वहीं विपक्ष का आरोप है कि चीनी से लेकर रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी का बजट बिगड़ रहा है। यही नही बल्कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जिसके चलते आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महंगाई के मुद्दे पर सियासी पारा और चढ़ने के आसार दिखाई दे रहे हैं।