Knews Desk-छत्रपति संभाजीनगर का खावड्या पर्वत लगातार हो रही मौतों के कारण सवालों के घेरे में है। हाल ही में चंदगुडे परिवार के तीन सदस्यों की यहां जान चली गई। कुणाल चंदगुडे ने कथित तौर पर पहाड़ से छलांग लगा दी। बेटे को बचाने की कोशिश में उसके पिता मुरलीधर चंदगुडे और मां संगीता चंदगुडे भी नीचे गिर गए और उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, खावड्या पर्वत पर इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। अब तक यहां 13 लोगों की जान जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा पिछले साल एक व्यक्ति द्वारा अपनी बहन को चट्टान से धक्का देने की घटना भी सामने आई थी।
खावड्या पर्वत तिसगांव इलाके में धुले-सोलापुर हाईवे के किनारे स्थित है। बड़े पैमाने पर हुई खुदाई के कारण पहाड़ का प्राकृतिक स्वरूप बदल गया है। पहाड़ का एक हिस्सा काटे जाने के बाद यहां करीब 246 फीट ऊंची सीधी चट्टान बन गई है। ढलान न होने के कारण यह जगह बेहद जोखिम भरी मानी जा रही है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यहां लोगों की आवाजाही रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। न तो प्रभावी बैरियर लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा जाल मौजूद है। प्रवेश रोकने से जुड़े चेतावनी बोर्ड भी पर्याप्त नहीं बताए जा रहे हैं। ऐसे में कोई भी व्यक्ति आसानी से इस खतरनाक हिस्से तक पहुंच सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था की मांग तेज
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊंची चट्टान के आसपास सुरक्षा जाल और मजबूत बैरिकेड लगाए जाने चाहिए। उनका मानना है कि तेज हवाओं या संतुलन बिगड़ने की स्थिति में भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
चंदगुडे परिवार की दर्दनाक घटना के बाद अब स्थानीय लोगों ने प्रशासन से खावड्या पर्वत पर प्रवेश नियंत्रित करने और तत्काल सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है। लगातार सामने आ रही मौतों ने इस जगह को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कब प्रशासन इस खतरनाक इलाके की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाएगा।