बाढ़ में घायल 53 साल की हथिनी जॉयमोती का वंतारा में होगा इलाज

KNEWS DESK- नागालैंड में आई भीषण बाढ़ के दौरान गंभीर रूप से घायल हुई 53 वर्षीय हथिनी जॉयमोती को बेहतर इलाज के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा लाया गया है। बाढ़ के तेज बहाव में बहने के बाद स्थानीय लोगों और सरकारी एजेंसियों ने उसे सुरक्षित बचाया था। हादसे में जॉयमोती को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उसे विशेषज्ञ पशु चिकित्सा उपचार की जरूरत महसूस हुई।

बाढ़ के दौरान जॉयमोती के माथे, दाहिने कान, पूंछ के ऊपर, बाईं जांघ और पेट पर गहरे घाव हो गए थे। इसके अलावा उसके बाहरी जननांग क्षेत्र के आसपास भी गंभीर चोट बताई गई है। उसकी दाहिनी आंख भी बुरी तरह प्रभावित हुई, जिसके कारण उस आंख की रोशनी चली गई है और लगातार पानी निकल रहा है। जॉयमोती को पहले स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार दिया गया। उसके घावों की ड्रेसिंग की गई और दर्द कम करने के लिए जरूरी उपचार के साथ मल्टीविटामिन और मिनरल सप्लीमेंट दिए गए। हालांकि, उसकी उम्र, चोटों की गंभीरता और पहले से मौजूद चलने-फिरने की समस्या को देखते हुए विशेषज्ञ देखभाल की जरूरत थी।

जॉयमोती के बाएं पिछले पैर में लंबे समय से लंगड़ाने की समस्या भी है। बताया गया है कि लकड़ी काटने के दौरान लगी फ्रैक्चर की चोट के कारण यह परेशानी हुई थी। इसके चलते उसे चलने, भोजन और पानी तक पहुंचने में भी मुश्किल होती है। ऐसे में लंबी सड़क यात्रा उसके लिए और अधिक शारीरिक परेशानी पैदा कर सकती थी। इसी वजह से जॉयमोती को एयरलिफ्ट करके जामनगर के वंतारा पहुंचाने का फैसला लिया गया। यात्रा से पहले उसकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया गया और विमान में चढ़ाने से लेकर उड़ान के दौरान निगरानी तक विशेष सावधानियां बरती गईं। पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य उसके तनाव और शारीरिक परेशानी को कम करना था।

भारत में किसी हाथी को गहन चिकित्सा उपचार के लिए एयरलिफ्ट किए जाने की यह अपनी तरह की पहली कोशिश बताई जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में पशु चिकित्सकों और लॉजिस्टिक्स टीम के बीच विशेष समन्वय की जरूरत पड़ी। हवाई यात्रा के जरिए जॉयमोती को कम समय में विशेषज्ञ हाथी अस्पताल तक पहुंचाया गया, जिससे लंबी सड़क यात्रा के दौरान होने वाले शारीरिक दबाव से उसे बचाया जा सका। अब वंतारा में जॉयमोती की व्यापक चिकित्सा जांच की जाएगी। डॉक्टर उसके घावों, आंख की स्थिति, पैर की पुरानी चोट और पोषण संबंधी जरूरतों के आधार पर आगे का उपचार तय करेंगे। उसकी रिकवरी के लिए दवाओं, उचित पोषण और लगातार निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।

इस मामले के बीच वन्यजीवों के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत भी सामने आई है। वंतारा ने असम में तीन वन्यजीव चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें हाथियों के लिए एक समर्पित सुविधा भी शामिल होगी। इन केंद्रों का उद्देश्य घायल वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास के करीब ही विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना है।

जॉयमोती को वंतारा लाना उसका स्थायी स्थानांतरण नहीं है। इलाज पूरा होने और चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ घोषित किए जाने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में वापस भेजा जाएगा। फिलहाल उसकी सेहत में सुधार और सुरक्षित रिकवरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

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