KNEWS DESK- गोरखालैंड की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को सुकना में पहाड़ी नेताओं के साथ अहम बैठक की। बैठक में दार्जिलिंग पहाड़ियों से जुड़े पुराने मुद्दों और उनके स्थायी राजनीतिक समाधान पर चर्चा हुई। इसके बाद केंद्र सरकार ने पहाड़ी इलाकों की समस्याओं को सुलझाने के लिए एक विशेष कमेटी बनाने का फैसला किया है।
बैठक में अमित शाह के अलावा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पहाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। माना जा रहा है कि बातचीत का मुख्य फोकस गोरखा समुदाय और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के लिए संवैधानिक दायरे में स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशने पर रहा। गोरखा समुदाय की ओर से अलग गोरखालैंड राज्य की मांग कई दशकों से की जाती रही है। इस मुद्दे को हल करने के लिए पहले दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल और गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) जैसी व्यवस्थाएं बनाई गईं, लेकिन इनसे क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
पहाड़ी समस्याओं के लिए बनेगी कमेटी
बैठक के बाद दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने बताया कि पहाड़ी इलाकों की पुरानी समस्याओं और मांगों पर काम करने के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। पंकज कुमार सिंह इस कमेटी में मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे। कमेटी में पहाड़ी क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
इस कमेटी का उद्देश्य क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों, मांगों और समस्याओं को समझकर केंद्र सरकार के सामने रखना और उनके समाधान की दिशा में काम करना होगा।
संवैधानिक दायरे में समाधान की कोशिश
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता रोशन गिरी ने भी कमेटी के गठन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों की मांगों को केंद्र के सामने रखने के लिए यह मंच महत्वपूर्ण होगा और समस्याओं का समाधान संवैधानिक प्रावधानों के तहत तलाशा जाएगा। हालांकि, अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर बैठक में शामिल नेताओं की ओर से अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
अब पहाड़ी क्षेत्र के राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों की नजर इस नई कमेटी की कार्यवाही पर है। माना जा रहा है कि इसके जरिए दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों की लंबे समय से लंबित मांगों को केंद्र के साथ बातचीत के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश होगी।