Xiaomi-Vivo-Oppo की बढ़ेगी टेंशन? भारत ला रहा है नया स्वदेशी स्मार्टफोन ब्रैंड

Knews Desk– भारत के स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर देसी ब्रैंड्स की वापसी की उम्मीद जगी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि सरकार ने तीन ऐसी संभावित कंपनियों की पहचान की है, जो आने वाले समय में एक मजबूत भारतीय स्मार्टफोन ब्रैंड तैयार कर सकती हैं. सरकार का अनुमान है कि अगले 10 से 14 महीनों में इनमें से कोई कंपनी बाजार में अपना ब्रैंड उतार सकती है. अगर ऐसा होता है तो माइक्रोमैक्स, कार्बन और लावा जैसे भारतीय मोबाइल ब्रैंड्स के पुराने दौर की यादें एक बार फिर ताजा हो सकती हैं.

केंद्र सरकार नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम यानी MPMS के जरिए देश में मोबाइल निर्माण के साथ-साथ भारतीय टेक्नोलॉजी ब्रैंड्स को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है. इसी योजना के तहत तीन संभावित कंपनियों की पहचान की गई है. हालांकि अश्विनी वैष्णव ने इन कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं. उन्होंने संकेत दिया है कि इनमें भारतीय स्मार्टफोन ब्रैंड बनाने की क्षमता है और अगले साल के मध्य तक इनमें से कोई कंपनी एक मजबूत ब्रैंड के तौर पर सामने आ सकती है.भारत का स्मार्टफोन बाजार फिलहाल बड़ी विदेशी कंपनियों के दबदबे में है. CMR के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, देश के टॉप-5 स्मार्टफोन ब्रैंड्स में चार चीनी कंपनियां शामिल हैं. इनमें Vivo, Oppo, Xiaomi और Realme का नाम है. वहीं Samsung टॉप-5 में शामिल एकमात्र दक्षिण कोरियाई कंपनी है. ऐसे में अगर कोई नया भारतीय ब्रैंड बाजार में उतरता है तो उसे इन स्थापित कंपनियों से सीधी चुनौती मिलेगी.

एक समय भारत में माइक्रोमैक्स, कार्बन और लावा जैसे घरेलू मोबाइल ब्रैंड्स की अच्छी पकड़ थी. खासतौर पर माइक्रोमैक्स ने कम कीमत में बेहतर फीचर्स वाले फोन उपलब्ध कराकर बड़ी संख्या में ग्राहकों को आकर्षित किया था. फीचर फोन से स्मार्टफोन की तरफ बढ़ रहे भारतीय बाजार में इन कंपनियों की मजबूत मौजूदगी थी. लेकिन धीरे-धीरे Xiaomi, Vivo और Oppo जैसी चीनी कंपनियों ने आक्रामक कीमतों, बेहतर फीचर्स, मार्केटिंग और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बना ली.अब नए भारतीय ब्रैंड के सामने चुनौती पहले से कहीं ज्यादा बड़ी होगी. सिर्फ सस्ते स्मार्टफोन लॉन्च करने से बाजार में सफलता मिलना आसान नहीं होगा. ग्राहकों के लिए कैमरा, बैटरी, प्रोसेसर, डिस्प्ले और सॉफ्टवेयर के साथ-साथ फोन की क्वालिटी और भरोसा भी अहम है. इसके अलावा बिक्री के बाद की सर्विस भी किसी ब्रैंड की सफलता में बड़ी भूमिका निभाती है.

चीनी कंपनियों ने भारत में पिछले कई वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर सर्विस सेंटर और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार किया है. नए भारतीय ब्रैंड को भी देशभर में मजबूत कस्टमर सपोर्ट उपलब्ध कराना होगा. साथ ही उसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ानी होगी.भारत में फिलहाल Lava जैसे घरेलू ब्रैंड मौजूद हैं और AI+ जैसे नए नाम भी बाजार में दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में आने वाले 10 से 14 महीने भारतीय स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए काफी अहम हो सकते हैं. अगर सरकार की योजना सफल होती है और कोई नया भारतीय ब्रैंड ग्राहकों का भरोसा जीतने में कामयाब रहता है, तो देश के मोबाइल बाजार में एक बार फिर ‘मेड इन इंडिया’ और ‘इंडियन ब्रैंड’ की मजबूत पहचान बन सकती है.

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