Jharkhand News: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद चयनित अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है, जबकि आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा और तेज कर दिया है।
Knews Desk- झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सियासी और छात्र आंदोलन का माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। 11वीं से 13वीं JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों ने खुशी जताई और कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। वहीं, परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे छात्रों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
11वीं-13वीं JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा रद्द करने के सरकारी आदेश के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। 20 अगस्त को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है।
अदालत के आदेश के बाद चयनित अभ्यर्थियों ने इसे अपने लिए बड़ी राहत बताया। उनका कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा और सभी सफल अभ्यर्थियों के भविष्य को दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए।
JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
हाईकोर्ट के फैसले के बाद JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच से जुड़े आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों ने आरोप लगाया कि सरकार ने अदालत में इस मामले की मजबूती से पैरवी नहीं की।
आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि सरकार के वकील कोर्ट के सामने परीक्षा रद्द करने के पीछे पर्याप्त और संतोषजनक कारण नहीं रख सके। छात्रों ने आरोप लगाया कि 22 परीक्षाओं को रद्द करने और 23 परीक्षाओं की CID जांच की घोषणा केवल आंदोलन को शांत कराने की कोशिश थी।
छात्रों ने 21 अगस्त को झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंकने का भी ऐलान किया है।
JSSC-CGL अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी
वहीं, JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में चयनित करीब 1932 अभ्यर्थी पिछले तीन दिनों से रांची में आंदोलन कर रहे हैं। भारी बारिश के बावजूद अभ्यर्थी धरने पर डटे हुए हैं।
20 अगस्त की रात प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे कई अभ्यर्थियों ने सड़क पर ही रात गुजारी। इससे पहले मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने गले में फंदा डालकर ‘न्याय दो या फांसी दो’ और ‘JSSC-CGL रद्द करने का फैसला वापस लो’ जैसे नारे लगाए।
केंद्र की नौकरी छोड़कर झारखंड आए अभ्यर्थी
प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और मेरिट के आधार पर JSSC-CGL में सफलता हासिल की थी। उनका दावा है कि करीब 500 से 600 अभ्यर्थियों ने रेलवे, केंद्रीय GST, डाक विभाग और IT विभाग जैसी केंद्र सरकार की नौकरियां छोड़कर झारखंड में सेवा करने का फैसला किया था।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों में भी यह स्पष्ट किया गया था कि जांच के दौरान यदि कोई व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से किसी गड़बड़ी में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है।
‘दोषियों पर कार्रवाई हो, सभी को सजा क्यों?’
चयनित अभ्यर्थियों की मांग है कि अगर परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि कुछ लोगों की कथित गलती की सजा उन हजारों अभ्यर्थियों को नहीं मिलनी चाहिए, जिन्होंने मेहनत और मेरिट के आधार पर परीक्षा पास की है।
JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट का भी रुख किया है। वहीं, 21 अगस्त को CDPO परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर भी हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।
इस पूरे विवाद के बीच झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, सरकारी फैसलों और चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं।