राजनीति न करे विपक्ष, SIR होगा सख्त !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के शुद्धिकरण व सटीक बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का दूसरा चरण गतिमान है। एस आई आर के तहत वर्तमान समय दावे व आपत्तियों के निस्तारण का चल रहा है। मतदाताओं द्वारा 14 जुलाई से 13 अगस्त तक फॉर्म 6,7,8 के माध्यम से दावे व आपत्तियां दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद निर्वाचन आयोग वेरिफिकेशन कर निपटारा कर रहे है। लेकिन देखा यह भी जा रहा है कि एसआईआर प्रक्रिया के चलते सियासी तापमान भी बढ़ रहा है। एक ओर सत्ता पक्ष इस प्रक्रिया को लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम मान रहा है. वही विपक्ष इस प्रक्रिया को सत्ता पक्ष का फरेब बता रहा है। दरअसल, मामला प्रदेश के रुड़की पिरान कलियर विधानसभा सीट पर विधायक हाजी फुरकान अहमद के नाम पर दर्ज आपत्ति को लेकर है. जिसने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। आपत्ति में विधायक को कलियर विधानसभा क्षेत्र का निवासी नहीं बताया गया है। लेकिन विवाद उस वक्त और गहरा गया जब जिस व्यक्ति के नाम से यह आपत्ति दर्ज होने की बात सामने आई,उसी व्यक्ति ने आपत्ति दर्ज कराने से इनकार कर दिया है। इसके बाद सवाल सिर्फ SIR की प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि इसके पीछे की राजनीतिक मंशा पर भी उठने लगे हैं। विपक्ष का सवाल है. कि अगर आपत्ति दर्ज कराने वाला व्यक्ति ही इससे इनकार कर रहा है, तो फिर आपत्ति कहां से आई है। जिसके बाद सत्ता पक्ष सफाई देता नज़र आ रहा है, लेकिन विपक्ष फर्जी आपत्ति लगाने वालों पर कार्यवाही की मांग कर रहा है. इस बीच एसआईआर की प्रकिर्या ने राजनितिक रंग लेकर मुद्दे का रूप ले लिया है, जिसके चलते आपसी बयानबाज़ी चरम पर देखने को मिल रही है.


उत्तराखंड राज्य में चल रहे एस आई आर के दूसरे चरण की प्रक्रिया 13 अगस्त को संपन्न हो गई है. एस आई आर के दूसरे चरण के तहत 14 जुलाई से 13 अगस्त के बीच कुल 2 लाख 83 हजार 890 दावे एवं आपत्तियां तमाम माध्यमों से प्राप्त हुई हैं. जिसमें फॉर्म- 6 के 1.28 लाख, फार्म- 7 के 1.07 लाख और फार्म- 8 के 47 हज़ार आवेदन प्राप्त हुए है. ऐसे में अब 14 अगस्त से एस आई आर के तीसरे चरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है.जिस पर प्रदेश के कई जिलों से नाम काटने उम्र का सही विवरण, स्थानीय पता आदि सम्मिलित है.वही कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के वोट निरस्त कराने के लिए कथित तौर पर गलत जानकारी के आधार पर आवेदन दिए जाने को गंभीर मामला बताया है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से ऐसे मामलों में कार्रवाई और दंड का प्रावधान करने की मांग की है. जिसको लेकर राजनैतिक प्रतिक्रिया के साथ आरोप प्रत्यारोप से राजनीति भी चुनाव आने से पहले बेहद गरमा गई है.वही प्रदेश के अन्य जिलों से भी  एस आई आर को लेकर शिकायत जिला अधिकारियों को दर्ज कराई जा रही है 

कुल मिलाकर देखा जाए तो एस आई आर की प्रक्रिया तकनीकी तौर पर मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अब यह राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। सत्ता पक्ष इसे पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती से जोड़ रहा है, जबकि विपक्ष इसे वोट काटने और गुमराह करने की साजिश बता रहा है। रुड़की की पिरान कलियर सीट पर विधायक के नाम पर दर्ज आपत्ति और फिर उसके पीछे वाले व्यक्ति के इनकार ने इस शक को और गहरा कर दिया है. कि कहीं प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए तो नहीं हो रहा। चुनाव आयोग के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह निष्पक्षता के साथ सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण करे, ताकि मतदाताओं का भरोसा बना रहे। क्योंकि साफ सुथरी मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद है। लेकिन मौजूदा हालात में एस आई आर अब सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले का सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बन चुकी है।  

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