नाकाम व्यवस्था के जिम्मेदार अफसर ही कर रहे जांच, अशोकधाम हादसे में इंसाफ पर उठे सवाल

लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में भगदड़ के बाद जांच प्रक्रिया सवालों के घेरे में है. हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई, लेकिन जांच की जिम्मेदारी उन्हीं अधिकारियों को दी गई है जो घटना के वक्त मौके पर तैनात थे.

Knews Desk- लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में तीसरी सोमवारी के दौरान हुई भगदड़ ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मंदिर जाने के रास्ते पर मची भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई. हादसे के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश तो दिए, लेकिन जांच टीम की संरचना को लेकर अब निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस वक्त हादसा हुआ, उस समय भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों के पास थी, उन्हीं में से कुछ अधिकारियों को जांच टीम में शामिल कर दिया गया. डीएम शैलेंद्र कुमार ने जांच की जिम्मेदारी एडीएम नीरज कुमार को सौंपी है. टीम में एसडीएम प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार भी शामिल हैं.

हादसे के समय एसडीएम और एसडीपीओ दोनों मंदिर परिसर में ड्यूटी पर मौजूद थे और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि व्यवस्था में चूक की जांच करने वाली टीम खुद उसी व्यवस्था का हिस्सा रही है तो जांच कितनी निष्पक्ष हो पाएगी?

24 घंटे में रिपोर्ट देने का आदेश, अब तक इंतजार

जिला प्रशासन ने जांच टीम को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था. यह समय सीमा बुधवार को समाप्त हो चुकी है, लेकिन अभी तक रिपोर्ट सामने नहीं आई है. एडीएम नीरज कुमार के मुताबिक जांच अंतिम चरण में है. घटनास्थल का निरीक्षण किया जा चुका है और मंदिर प्रबंधन के साथ-साथ पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है.

हालांकि, तय समय के भीतर रिपोर्ट नहीं आने से सवाल और गहरे हो गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी या बाहरी एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी स्तर की प्रशासनिक लापरवाही की निष्पक्ष तरीके से पहचान हो सके.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने की बात

हादसे में जान गंवाने वाली सात महिलाओं की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण दम घुटना बताई गई है. भीड़ का दबाव इतना ज्यादा था कि गर्दन और सीने पर गंभीर चोटें आईं और शरीर के जरूरी अंगों ने काम करना बंद कर दिया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर मंदिर परिसर और उसके आसपास भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था कैसी थी और श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त क्यों नहीं किए गए.

मंदिर ट्रस्ट की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस पूरे मामले में मंदिर ट्रस्ट की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. खास बात यह है कि डीएम शैलेंद्र कुमार अशोकधाम मंदिर ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष भी हैं. ऐसे में बैरिकेडिंग, प्रवेश और निकास व्यवस्था तथा सुरक्षा इंतजामों में अगर कोई बड़ी कमी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा.

बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है. लेकिन अब असली सवाल यही है कि क्या जांच रिपोर्ट में प्रशासनिक चूक की भी निष्पक्ष तरीके से पहचान होगी?

सात महिलाओं की मौत के बाद उनके परिवारों को सिर्फ मुआवजे या कार्रवाई के आश्वासन से ज्यादा जरूरत है—उन्हें यह जानने का अधिकार है कि हादसे के पीछे कौन जिम्मेदार था और ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *