KNEWS DESK- खाने-पीने के प्रोडक्ट्स पर ‘100% Pure’, ‘100% Natural’ और ‘100%’ जैसे दावों को लेकर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सख्ती बढ़ा दी है। कंपनियां अक्सर ऐसे दावों का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट को बेहतर और ज्यादा भरोसेमंद दिखाने के लिए करती हैं, लेकिन अब खाद्य नियामक ऐसे दावों की भाषा और उनके पीछे मौजूद प्रमाणों पर नजर रख रहा है।
FSSAI की कार्रवाई के बाद कई कंपनियों ने अपने पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रमोशनल कंटेंट से ‘100%’ वाले दावों को हटाना शुरू कर दिया है। इनमें BONN BISCUITS, Zandu Honey, Amway India और Juza Foods जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं।
किसी खाद्य उत्पाद के पैकेट पर ‘100% Pure’ या ‘100% Natural’ लिखा देखकर ग्राहक यह मान सकता है कि प्रोडक्ट पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और किसी भी तरह की मिलावट से मुक्त है। FSSAI का फोकस इस बात पर है कि खाद्य उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों में इस्तेमाल होने वाली भाषा साफ, सटीक और प्रमाणित करने योग्य हो। ऐसे दावे जो उपभोक्ता को भ्रमित कर सकते हैं या प्रोडक्ट की विशेषताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकते हैं, उन पर नियामक की नजर है।
कंपनियों को क्या बदलाव करने पड़े?
FSSAI की कार्रवाई और निर्देशों के बाद कुछ कंपनियों ने अपने उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों में बदलाव किए हैं। ‘100%’ जैसे शब्दों को हटाकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो उत्पाद की वास्तविक विशेषताओं को अधिक स्पष्ट तरीके से बताती है। इसका सीधा असर उन पैकेजिंग और विज्ञापनों पर पड़ता है, जिनमें प्रोडक्ट की शुद्धता या प्राकृतिक होने को लेकर पूर्ण दावा किया जाता है।
Dabur के प्रोडक्ट्स भी आए थे जांच के दायरे में
‘100%’ दावों को लेकर Dabur India का मामला भी चर्चा में रहा है। FSSAI की कार्रवाई में कंपनी के कुछ खाद्य उत्पादों पर इस्तेमाल किए गए दावों को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इनमें शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पाद शामिल थे। इनमें कुछ प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग या प्रचार में ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’, ‘100% Organic’ और ‘100% Tender Coconut Water’ जैसे दावे किए गए थे।
FSSAI की सख्ती का मकसद सिर्फ कंपनियों की पैकेजिंग बदलना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को स्पष्ट और सही जानकारी उपलब्ध कराना है। ग्राहकों को भी किसी प्रोडक्ट को केवल ‘100% Pure’ या ‘100% Natural’ जैसे शब्द देखकर खरीदने के बजाय उसके लेबल पर मौजूद सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी, निर्माता की जानकारी और अन्य जरूरी विवरणों को ध्यान से देखना चाहिए।
FSSAI की निगरानी सिर्फ पैकेट तक सीमित नहीं है। टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों में किए गए दावों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। खाद्य कंपनियों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने उत्पादों के बारे में ऐसे दावे करें जिन्हें उचित प्रमाण और निर्धारित मानकों के आधार पर सही ठहराया जा सके।
आगे और कंपनियों पर हो सकती है कार्रवाई?
‘100%’ दावों को लेकर नियामक की सख्ती बढ़ने से आने वाले समय में और भी कंपनियों को अपनी पैकेजिंग और मार्केटिंग रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि खाद्य उत्पादों के विज्ञापन में बड़े-बड़े दावों के बजाय उपभोक्ता को सही और सत्यापित जानकारी मिले। यही वजह है कि FSSAI ऐसे दावों की जांच पर लगातार जोर दे रहा है।