Knews Desk– झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने JPSC और JSSC से जुड़ी 45 भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार देर रात सरकार की ओर से एक के बाद एक 8 अधिसूचनाएं जारी की गईं। इनमें 39 परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है, जबकि 6 परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित रखा गया है। सरकार का यह फैसला परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और कदाचार को लेकर चल रही जांच के बीच आया है।सरकार के मुताबिक, रद्द या स्थगित की गई परीक्षाओं में हाल के वर्षों में आयोजित परीक्षाओं के साथ-साथ पुरानी परीक्षाएं भी शामिल हैं। इनमें कुछ ऐसी परीक्षाएं भी हैं, जो वर्ष 2014 के बाद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के माध्यम से आयोजित कराई गई थीं। परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद सरकार ने इन परीक्षाओं की समीक्षा की और अब उन्हें रद्द करने का फैसला लिया है।
रद्द की गई परीक्षाओं की सूची काफी लंबी है। इसमें डिप्टी कलेक्टर, ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सहायक अभियंता, दंत चिकित्सक, सिविल जज, अतिरिक्त लोक अभियोजक और वन क्षेत्राधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रवक्ता, सहायक वन संरक्षक, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी और विभिन्न प्रशासनिक एवं तकनीकी पदों से संबंधित परीक्षाओं पर भी कार्रवाई की गई है।सरकार का यह कदम छात्रों के लंबे समय से चल रहे विरोध और उनकी मांगों के बीच आया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर अभ्यर्थी लगातार निष्पक्ष जांच और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे थे। सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद अब परीक्षा रद्द करने और स्थगित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इससे पहले सरकार ने JSSC संयुक्त स्नातक स्तर यानी CGL परीक्षा को भी रद्द करने का ऐलान किया था। इसके साथ ही आउटसोर्स एजेंसी TDPL की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी किए गए परिणामों को भी रद्द कर दिया गया। अब 45 परीक्षाओं पर लिया गया ताजा फैसला सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।सरकार ने केवल परीक्षाएं रद्द करने तक सीमित रहने के बजाय भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए कई अहम फैसले भी लिए हैं। JPSC और JSSC में अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा दोनों आयोगों में आंतरिक निगरानी और सतर्कता प्रकोष्ठ बनाए जाने की योजना है।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक विशेष कमेटी भी गठित की गई है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनी यह समिति JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगी और करीब दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति परीक्षा प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता बढ़ाने के उपायों पर सुझाव देगी।सरकार के इस फैसले से जहां परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के खिलाफ सख्त संदेश गया है, वहीं उन हजारों अभ्यर्थियों की चिंता भी बढ़ सकती है, जिन्होंने इन परीक्षाओं की तैयारी की थी या चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। अब उम्मीदवारों की नजर सरकार की अगली अधिसूचनाओं और इन पदों के लिए होने वाली नई भर्ती प्रक्रिया पर रहेगी।