शी जिनपिंग का नया फरमान! स्कूलों और कार्यस्थलों में धार्मिक आस्था पर कड़ी निगरानी

KNEWS DESK- चीन में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। सिचुआन प्रांत के चेंगदू शहर में सरकारी संस्थानों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों और छात्रों की धार्मिक पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘धर्म के चीनीकरण’ अभियान से जुड़ी है।

बताया जा रहा है कि चेंगदू के एक सरकारी अस्पताल में कर्मचारियों से उनकी धार्मिक मान्यताओं को लेकर लिखित जानकारी मांगी गई। इस प्रक्रिया में स्थायी कर्मचारियों के अलावा अनुबंध और अस्थायी स्टाफ को भी शामिल किया गया है। जिन कर्मचारियों की कोई धार्मिक आस्था नहीं है, उन्हें भी अपनी स्थिति दर्ज कराने को कहा गया है।

अस्पतालों में धार्मिक पहचान की जानकारी

रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में कर्मचारियों की वैचारिक, जातीय और धार्मिक स्थिति की समीक्षा के नाम पर सर्वे कराया गया। कर्मचारियों को अपनी धार्मिक पहचान से जुड़ी जानकारी छिपाने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

बताया गया है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी CCP के सदस्यों के लिए धार्मिक आस्था को लेकर भी सख्त नियम लागू हैं। धार्मिक गतिविधियों और कार्यस्थल पर धर्मांतरण से जुड़े किसी भी प्रयास से दूर रहने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।

स्कूलों में परिवार की भी जांच का दावा

धार्मिक निगरानी का दायरा शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने का भी दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए शैक्षणिक सत्र में कुछ संस्थानों में छात्रों के दाखिले से पहले उनके परिवार की धार्मिक पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाई जा रही है।

सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि छात्रों और उनके परिजनों से जुड़ा संवेदनशील डेटा प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे छात्रों और परिवारों के बीच निजता और भविष्य में संभावित कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ने की बात कही जा रही है।

क्या है ‘धर्म का चीनीकरण’?

चीन में ‘Sinicization of Religion’ यानी धर्म के चीनीकरण की नीति लंबे समय से चर्चा में है। इसके तहत धार्मिक गतिविधियों को चीनी संस्कृति, राज्य की नीतियों और कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा के अनुरूप ढालने पर जोर दिया जाता है। आलोचकों का आरोप है कि इस नीति के जरिए सरकार धार्मिक संस्थाओं और लोगों की आस्था पर अपना नियंत्रण बढ़ा रही है। वहीं, चीन सरकार अपनी धार्मिक नीतियों को राष्ट्रीय एकता, सामाजिक स्थिरता और सुरक्षा से जोड़कर देखती है।

चेंगदू में धार्मिक पृष्ठभूमि को लेकर कथित सर्वे की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर चीन में धार्मिक स्वतंत्रता, निजता और सरकारी निगरानी को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि किए जाने की आवश्यकता बनी हुई है।

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