NDA का कुनबा बढ़ाने की तैयारी, क्या BJP के साथ आएंगे DMK, NCP और अकाली दल?

केंद्र की राजनीति में नए सियासी समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में NDA का विस्तार हो सकता है और इसमें DMK, NCP के दोनों धड़े और शिरोमणि अकाली दल की एंट्री की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

Knews Desk- क्या आने वाले दिनों में NDA का कुनबा और बड़ा होने वाला है? क्या DMK और BJP के बीच नजदीकियां बढ़ सकती हैं? क्या NCP के दोनों गुट एकजुट होकर NDA का हिस्सा बनेंगे और क्या शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर BJP के साथ खड़ा होगा? दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र, पंजाब और तमिलनाडु तक इन सवालों को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं।

दरअसल, केंद्र की NDA सरकार को संसद में मजबूत संख्याबल की जरूरत है। ऐसे में अगर DMK, एकीकृत NCP और अकाली दल जैसे दल NDA के साथ आते हैं तो सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है। परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी इन दलों का समर्थन केंद्र सरकार के लिए अहम साबित हो सकता है।

तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हैं। DMK अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर रणनीति पर मंथन कर रही है। पार्टी के कई नेताओं के दूसरे दलों में जाने की चर्चाओं के बीच संगठन को मजबूत बनाए रखना उसके लिए बड़ी चुनौती है।

वहीं, कांग्रेस और DMK के बीच भी पहले जैसी राजनीतिक नजदीकी नहीं दिख रही है। अगले विधानसभा चुनाव में अभी लंबा समय है। ऐसे में DMK अपने राजनीतिक आधार और नेताओं-कार्यकर्ताओं को साथ बनाए रखने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर सकती है।

इसी बीच BJP और DMK के बीच संवाद के रास्ते खुले रहने की चर्चा है। हालांकि दोनों दलों के बीच औपचारिक गठबंधन को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

स्पीकर की चाय पार्टी में दिखी सियासी गर्मजोशी

लोकसभा सत्र के समापन के मौके पर स्पीकर की पारंपरिक चाय पार्टी में विपक्षी दलों ने दूरी बनाई, लेकिन DMK ने इसमें हिस्सा लिया। DMK की ओर से कनिमोझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और NDA के अन्य नेताओं से बातचीत की।

इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि DMK केंद्र सरकार के कुछ मुद्दों पर मुद्दा आधारित समर्थन देने का विकल्प खुला रख सकती है।

NDA में शामिल होगी DMK?

DMK के लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर करीब 30 सांसद हैं। ऐसे में अगर पार्टी NDA के साथ आती है या बाहर से समर्थन देती है तो इससे केंद्र सरकार की संसदीय ताकत बढ़ सकती है।

हालांकि DMK के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय होने की बात कही जा रही है। पार्टी का एक धड़ा मुद्दों के आधार पर केंद्र सरकार का समर्थन करने के पक्ष में माना जा रहा है, जबकि दूसरा धड़ा BJP के साथ जाने को द्रविड़ राजनीति के लिए नुकसानदेह मान सकता है।

DMK के BJP के साथ औपचारिक रूप से जुड़ने का फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की बातचीत के बाद ही संभव होगा।

NCP के दोनों गुटों के एकीकरण की चर्चा

महाराष्ट्र में भी NCP के दोनों धड़ों के एक साथ आने की अटकलें तेज हैं। शरद पवार और अजित पवार के गुटों के बीच संभावित एकीकरण को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही है।

बताया जा रहा है कि BJP भी दोनों गुटों के एक होने के पक्ष में है। अगर NCP के दोनों धड़े एकजुट होते हैं तो एकीकृत पार्टी के NDA में शामिल होने की संभावना बन सकती है।

संसद के मानसून सत्र के दौरान सुप्रिया सुले की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात और शरद पवार की पीएम से हुई मुलाकात को भी इसी सियासी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, अगर दोनों गुट एक साथ आते हैं तो केंद्र की सरकार में NCP को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना भी बन सकती है। कृषि और सहकारिता जैसे मंत्रालयों को लेकर पार्टी की दिलचस्पी होने की चर्चा है।

अकाली दल से फिर दोस्ती के संकेत?

पंजाब में BJP और शिरोमणि अकाली दल के बीच पुराने गठबंधन की वापसी को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की हालिया मुलाकात के बाद इन अटकलों को और हवा मिली है।

लोकसभा में अकाली दल की संख्या भले ही सीमित हो, लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव के लिहाज से दोनों दलों की संभावित साझेदारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

वहीं, नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी सहित BJP के कई वरिष्ठ नेताओं ने हरसिमरत कौर बादल से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल जाना। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

ऐसे में आने वाले समय में BJP और अकाली दल के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

NDA के विस्तार से क्या बदलेगा?

अगर DMK, एकीकृत NCP और अकाली दल NDA के साथ आते हैं तो केंद्र की राजनीति में गठबंधन का दायरा काफी बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल इन दलों के NDA में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

लेकिन संसद में संख्याबल, आगामी चुनाव और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इन दलों के साथ संभावित तालमेल ने देश की सियासत में नई चर्चाओं को जरूर जन्म दे दिया है।

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