Knews Desk– भारत में थोक महंगाई के मोर्चे पर जुलाई में मामूली राहत देखने को मिली है। कॉमर्स मिनिस्ट्री की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर जून के 9.87 फीसदी से घटकर जुलाई में 9.78 फीसदी हो गई। हालांकि, यह गिरावट बहुत मामूली है, लेकिन फ्यूल और बिजली की कीमतों में महंगाई का दबाव कम होने से राहत की उम्मीद बढ़ी है। जून में नई WPI सीरीज के तहत थोक महंगाई अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची थी।जुलाई के आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई जून के 4.38 फीसदी से बढ़कर जुलाई में 4.45 फीसदी हो गई। ऐसे में थोक महंगाई में आई कमी को आने वाले समय में कीमतों के दबाव के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
जुलाई में फ्यूल और बिजली की कैटेगरी में सबसे बड़ी राहत देखने को मिली। इस समूह की महंगाई दर जून के 27.41 फीसदी से घटकर जुलाई में 20.05 फीसदी रह गई। हालांकि, प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर बढ़ी है। जुलाई में यह 8.52 फीसदी रही, जबकि जून में यह 7 फीसदी थी। इसी तरह मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर भी जून के 7.48 फीसदी से बढ़कर जुलाई में 8.29 फीसदी हो गई।
खाने-पीने की चीजों की कीमतों ने भी महंगाई का दबाव बढ़ाया है। WPI फूड इंडेक्स में जुलाई में महंगाई दर 6.65 फीसदी रही, जो जून में 6.14 फीसदी थी। प्राइमरी आर्टिकल्स में खाने-पीने की चीजों की महंगाई 5.44 फीसदी रही। वहीं मिनरल्स की महंगाई 13.28 फीसदी और अन्य वस्तुओं की महंगाई 17.66 फीसदी दर्ज की गई।मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की बात करें तो खाद्य उत्पादों में महंगाई दर 8.89 फीसदी रही। बेसिक मेटल्स में यह 12.56 फीसदी और केमिकल्स व केमिकल प्रोडक्ट्स में 13.12 फीसदी रही। सरकार के मुताबिक, जुलाई में WPI महंगाई को बढ़ाने में मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुओं, बेसिक मेटल्स, खाद्य उत्पादों और केमिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों की अहम भूमिका रही।
यह जुलाई का आंकड़ा 2022-23 को बेस ईयर मानकर तैयार की गई नई WPI सीरीज के तहत तीसरी मासिक रीडिंग है। सरकार ने जून में 2011-12 के पुराने बेस ईयर की जगह 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाया था। नई सीरीज में WPI बास्केट में शामिल वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इसके अलावा बिजली समूह में सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा जैसे स्रोतों को भी शामिल किया गया है।नई WPI सीरीज में अलग-अलग समूहों के वेटेज में भी बदलाव किया गया है। इंडेक्स में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का सबसे ज्यादा 63.1 फीसदी हिस्सा है, जबकि प्राइमरी आर्टिकल्स का 22.8 फीसदी और फ्यूल व बिजली का 14.1 फीसदी भार है। कुल मिलाकर जुलाई में थोक महंगाई में मामूली कमी जरूर आई है, लेकिन खाद्य पदार्थों और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की बढ़ती महंगाई अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।