नोएडा फेस-2 में 13 अप्रैल को हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन के मामले में आरोपी सत्यम वर्मा को एक मुकदमे में कोर्ट से जमानत मिल गई है. बचाव पक्ष ने एक करोड़ रुपए के लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों पर सवाल उठाए.
Knews Desk- नोएडा के फेस-2 औद्योगिक क्षेत्र में 13 अप्रैल को हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन के मामले में आरोपी सत्यम वर्मा को कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने एक मुकदमे में उसे जमानत दे दी है। हालांकि, अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी होने के कारण उसकी तत्काल रिहाई नहीं होगी।
13 अप्रैल को नोएडा फेस-2 के औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों का आंदोलन हिंसक हो गया था। प्रदर्शन के दौरान पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं। घटना के बाद पुलिस ने कई थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए और आरोपियों की तलाश शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने आदित्य आनंद, हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा समेत कई लोगों को आरोपी बनाया। पुलिस का आरोप था कि इन लोगों ने श्रमिकों को भड़काने और हिंसा को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई थी।
पत्रकार बताया गया है सत्यम वर्मा
सत्यम वर्मा लखनऊ का रहने वाला है और उसे पत्रकार बताया गया है। पुलिस जांच में उसका संपर्क मजदूर बिगुल दस्ता से जुड़े लोगों के साथ होने का दावा किया गया। पुलिस के मुताबिक, तकनीकी जांच और पूछताछ के आधार पर सत्यम का नाम सामने आया था।
जांच एजेंसी ने उस पर आंदोलन से जुड़े लोगों के संपर्क में रहने और कथित तौर पर हिंसा की साजिश में भूमिका निभाने जैसे आरोप लगाए थे।
एक करोड़ रुपये के लेनदेन पर बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सत्यम वर्मा के वकील ने पुलिस की जांच और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दावों पर सवाल खड़े किए। बचाव पक्ष ने करीब एक करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस ने इस रकम को हिंसा या किसी आपराधिक साजिश से जोड़ने वाला ठोस सबूत अदालत के सामने पेश नहीं किया।
वकील की दलील थी कि किसी बैंक खाते में लेनदेन होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि रकम का संबंध नोएडा की हिंसा से है। इसके लिए पुलिस को लेनदेन और कथित अपराध के बीच सीधा संबंध स्थापित करने वाले दस्तावेज या अन्य ठोस साक्ष्य पेश करने जरूरी थे।
पुलिस के दावों पर भी सवाल
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि सत्यम वर्मा को हिंसा से जोड़ने के लिए पुलिस की ओर से पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं किए गए हैं। वकील ने यह भी तर्क दिया कि जांच में सामने आए तथ्यों से सत्यम की हिंसा में सीधी भूमिका स्पष्ट नहीं होती।
मामले में उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने संबंधित मुकदमे में सत्यम वर्मा को जमानत दे दी।
हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद सत्यम वर्मा अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा, क्योंकि उसके खिलाफ अन्य मुकदमे भी दर्ज हैं। उन मामलों में जारी कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की ओर से पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की स्थिति तय होगी।