Knews Desk- देश की राजनीति में Gen-Z यानी युवा मतदाताओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है. राजनीतिक दल भी इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने के लिए सोशल मीडिया और अलग-अलग अभियानों का सहारा ले रहे हैं. इसी बीच CVoter के स्नैप पोल में Gen-Z की राजनीतिक पसंद और चुनावी प्राथमिकताओं को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं.
TV9 भारतवर्ष के साथ किए गए इस सर्वे में युवाओं से चुनावी मुद्दों, वोट देने के आधार, सोशल मीडिया के प्रभाव, राजनीतिक दलों की समझ, राष्ट्रवाद और उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता समेत 10 सवाल पूछे गए.
सर्वे में शामिल कुल 53 फीसदी लोगों ने रोजगार, शिक्षा और हेल्थकेयर को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. NDA समर्थकों में यह आंकड़ा 56.7 फीसदी रहा, जबकि विपक्ष का समर्थन करने वाले 51.7 फीसदी लोगों ने भी इन्हीं मुद्दों को प्राथमिकता दी. अन्य वर्ग के 45.8 फीसदी लोगों ने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रमुख मुद्दा माना.
वहीं भ्रष्टाचार को लेकर कुल 11.9 फीसदी लोगों ने इसे अहम चुनावी मुद्दा बताया. NDA समर्थकों में यह आंकड़ा 11.6 फीसदी, विपक्षी समर्थकों में 12.2 फीसदी और अन्य लोगों में 12.1 फीसदी रहा.
वोट देते समय मुद्दे या नेता, किसे तरजीह?
Gen-Z के वोटिंग पैटर्न को लेकर भी सर्वे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई. कुल 33.3 फीसदी लोगों ने कहा कि वे मतदान के समय मुद्दों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं. NDA समर्थकों में 30.5 फीसदी और विपक्षी समर्थकों में 33.3 फीसदी लोगों ने मुद्दों को प्राथमिकता दी.
मुद्दों के बाद नेता दूसरा बड़ा फैक्टर रहा. NDA समर्थकों में 22.9 फीसदी और विपक्षी समर्थकों में 23.1 फीसदी लोगों ने नेता को वोट तय करने में महत्वपूर्ण माना.
राजनीतिक राय बनाने में सोशल मीडिया का कितना असर?
आज की Gen-Z के लिए सोशल मीडिया राजनीति को समझने और राय बनाने का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है. CVoter सर्वे में कुल 49.3 फीसदी लोगों ने माना कि सोशल मीडिया उनकी राजनीतिक राय बनाने में अहम भूमिका निभाता है.
NDA समर्थकों में 53.2 फीसदी लोगों ने सोशल मीडिया के प्रभाव को स्वीकार किया, जबकि विपक्षी समर्थकों में यह आंकड़ा 48.3 फीसदी रहा. अन्य लोगों में 40.7 फीसदी ने सोशल मीडिया को राजनीतिक राय बनाने में महत्वपूर्ण माना.
क्या राजनीतिक दल Gen-Z की चिंताओं को समझते हैं?
सर्वे का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि बड़ी संख्या में युवा यह मानते हैं कि राजनीतिक दल उनकी वास्तविक चिंताओं को समझ नहीं पा रहे हैं.
कुल 58.7 फीसदी लोगों ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां Gen-Z की चिंताओं को नहीं समझतीं. NDA समर्थकों में 54 फीसदी, विपक्षी समर्थकों में 64 फीसदी और अन्य वर्ग में 58.7 फीसदी लोगों ने ऐसा माना.
इसके उलट, केवल 26 फीसदी NDA समर्थकों और 17.1 फीसदी विपक्षी समर्थकों ने माना कि राजनीतिक दल युवाओं की चिंताओं को समझते हैं.
अपनी जाति के उम्मीदवार को वोट देना जरूरी नहीं
जाति आधारित मतदान को लेकर भी सर्वे में दिलचस्प तस्वीर सामने आई. कुल 24.4 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अपनी जाति के उम्मीदवार को वोट देना पसंद करते हैं. वहीं 48.2 फीसदी ने इससे इनकार किया.
NDA समर्थकों में 50.6 फीसदी और अन्य वर्ग में 50.8 फीसदी लोगों ने कहा कि वे केवल अपनी जाति के उम्मीदवार को वोट नहीं देते. विपक्षी समर्थकों में यह आंकड़ा 44.6 फीसदी रहा.
कैसे किया गया सर्वे?
Gen-Z की राजनीतिक सोच को समझने के लिए CVoter ने CATI यानी Computer Assisted Telephone Interview के जरिए यह स्नैप पोल किया. इसमें देशभर के 18 साल से अधिक और 35 साल से कम उम्र के लोगों को शामिल किया गया. सर्वे BARC-HSM के आधार पर किया गया है.
सर्वे में मैक्रो लेवल पर मार्जिन ऑफ एरर (MoE) +/-3 फीसदी और माइक्रो लेवल ट्रेंड के लिए +/-5 फीसदी बताया गया है. यह आंकड़े 95 फीसदी कॉन्फिडेंस इंटरवल पर आधारित हैं. कुल मिलाकर सर्वे का संकेत साफ है—Gen-Z के लिए चुनावी राजनीति में सिर्फ नेता या पार्टी ही निर्णायक नहीं हैं. रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और वास्तविक मुद्दे उनके वोट के फैसले में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.