Knews Desk- झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया है। सरकार का दावा है कि छात्रों की ज्यादातर मांगों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दो प्रमुख मुद्दों पर अब भी गतिरोध कायम है। यही वजह है कि बातचीत होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ।
सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जबकि स्थिति बिगड़ने पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।
इसी बीच विधानसभा में नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार और छात्रों के बीच हुई बातचीत का ब्योरा सदन में रखा। उन्होंने कहा कि कई मांगों पर सरकार सकारात्मक है, लेकिन दो मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। मंत्री ने आंदोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने छात्रों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश की है।
किन दो मांगों पर अब भी नहीं बनी सहमति?
CBI जांच की मांग पर सरकार तैयार नहीं
छात्र JPSC और JSSC CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग कर रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि CBI जांच उनकी प्रमुख मांग है और इस मुद्दे पर वे समझौता नहीं करेंगे। वहीं, सरकार CBI जांच के बजाय CID और ED के जरिए जांच कराने के पक्ष में है। मंत्री के मुताबिक, पूरे मामले में आर्थिक लेन-देन की आशंका को देखते हुए ED से भी जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात भी कही है।
यानी छात्रों की मांग CBI जांच की है, जबकि सरकार CID और ED के जरिए जांच आगे बढ़ाना चाहती है। फिलहाल यही आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाएं रद्द करने पर भी असहमति
छात्र JSSC CGL के अलावा परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सरकार फिलहाल इस मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। सरकार का तर्क है कि इन परीक्षाओं के आधार पर कई नियुक्तियां पहले ही हो चुकी हैं। ऐसे में सभी परीक्षाओं को एक साथ रद्द करना व्यावहारिक नहीं होगा।
हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी विशेष परीक्षा में गड़बड़ी के ठोस प्रमाण सामने आते हैं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
किन मांगों पर सरकार ने जताई सहमति?
छात्रों की 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग पर सरकार सहमत हो गई है। इसके अलावा बैकलॉग की 23वीं और 25वीं भर्तियों को रद्द करने पर भी सहमति बनी है।
छात्रों की परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। सरकार का कहना है कि राज्य के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों से सलाह लेकर भर्ती और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जाएंगे।
बातचीत के बावजूद क्यों जारी है आंदोलन?
सरकार का कहना है कि छात्रों की अधिकांश मांगों पर समाधान निकाल लिया गया है। लेकिन छात्रों के लिए CBI जांच और TDPL की सभी परीक्षाओं को रद्द करना सबसे अहम मुद्दों में शामिल है।
इन दोनों मांगों पर सरकार के पीछे नहीं हटने के कारण बातचीत के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हुआ है। छात्र अपनी प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं।
वहीं, सरकार की ओर से आंदोलन में राजनीतिक दखल का आरोप लगाया जा रहा है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि बीजेपी छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, छात्र इसे अपने अधिकारों और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की लड़ाई बता रहे हैं।
फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से कुछ मांगों पर रास्ता जरूर निकला है, लेकिन CBI जांच और TDPL की सभी परीक्षाओं को रद्द करने के मुद्दे पर सहमति नहीं बनने से झारखंड में छात्रों का आंदोलन अभी भी जारी है।