JPSC परीक्षा गड़बड़ी: मास्टरमाइंड अभय तिवारी का बड़ा दावा, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को ‘कट मनी’ के जरिए मिला ठेका

Knews Desk- झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में सीआईडी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए कथित मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। तिवारी के अनुसार, ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को परीक्षा से जुड़ा काम दिलाने के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ‘कट मनी डील’ हुई थी।

अभय तिवारी के इस कथित कबूलनामे के बाद JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल ख्यांगते की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। सीआईडी उनसे चार अलग-अलग दौर में 30 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ कर चुकी है।

परीक्षा नियंत्रक की आपत्ति को किया गया नजरअंदाज

सीआईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि TDPL को काम देने से पहले तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने एजेंसी के रिकॉर्ड को लेकर आपत्ति जताई थी। आरोप है कि उनकी लिखित आपत्तियों के बावजूद एजेंसी को परीक्षा का जिम्मा सौंप दिया गया।

बताया जा रहा है कि परीक्षा नियंत्रक ने आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी थी कि TDPL को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने 20 मई 2025 को अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में ब्लैकलिस्ट और डी-लिस्ट किया था। एजेंसी पर उत्तर प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में भी परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोप लग चुके थे।

इसके बावजूद TDPL को कथित तौर पर बिना खुली निविदा प्रक्रिया के सीधे नॉमिनेशन के आधार पर परीक्षा का संवेदनशील काम दिया गया।

पूर्व चेयरमैन ने किया अपना बचाव

पूछताछ के दौरान पूर्व JPSC चेयरमैन एल ख्यांगते ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि एजेंसी का चयन किए जाने के समय आयोग के पास उसके ब्लैकलिस्टेड होने की आधिकारिक जानकारी नहीं थी। उन्होंने इसे प्रशासनिक स्तर की चूक बताया है।

वहीं, सीआईडी इस पूरे मामले में आयोग के मौजूदा सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित समानांतर सिंडिकेट के संचालन में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही।

अब तक 19 गिरफ्तार

JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में सीआईडी की कार्रवाई जारी है। जांच के तहत TDPL के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को सील किया जा चुका है। मामले में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी और पूर्व अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

सीआईडी अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित परीक्षा सिंडिकेट में कौन-कौन लोग शामिल थे और परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं।

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