सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बढ़ते डीपफेक, फर्जी और भ्रामक कंटेंट को लेकर सरकार ने Meta से सख्त कदम उठाने को कहा है। सरकार ने कंपनी से अपने एल्गोरिदम में जरूरी सुधार करने और ऐसे कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए स्पष्ट रोडमैप पेश करने की मांग की है।
Knews Desk- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डीपफेक और फर्जी कंटेंट के बढ़ते प्रसार को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Meta से उसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद एल्गोरिदम को लेकर सुधार का रोडमैप मांगा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि भ्रामक, प्रोपेगेंडा और डीपफेक कंटेंट को बढ़ावा मिलने से रोका जाए और यूजर्स तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचे।
सरकार की चिंता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उन एल्गोरिदम को लेकर है, जो यूजर्स की पसंद और गतिविधियों के आधार पर कंटेंट की पहुंच बढ़ाते हैं। ऐसे में फर्जी या भ्रामक सामग्री तेजी से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है। सरकार चाहती है कि Meta अपने सिस्टम में ऐसे बदलाव करे, जिससे संदिग्ध और गलत कंटेंट की पहचान कर उसकी पहुंच को सीमित किया जा सके।
डीपफेक कंटेंट बड़ी चुनौती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक वीडियो, फोटो और ऑडियो बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। डीपफेक तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज या तस्वीर का इस्तेमाल कर ऐसा कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जो देखने या सुनने में असली जैसा लगे। सरकार का मानना है कि इस तरह के कंटेंट से गलत सूचना फैलने और लोगों को गुमराह किए जाने का खतरा बढ़ सकता है।
Meta से मांगा स्पष्ट रोडमैप
सरकार ने Meta से यह बताने को कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर फर्जी, भ्रामक और डीपफेक कंटेंट को रोकने के लिए क्या तकनीकी और नीतिगत बदलाव करेगी। इसके साथ ही एल्गोरिदम के स्तर पर किए जाने वाले सुधारों को लेकर भी स्पष्ट रोडमैप देने की मांग की गई है।
सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाने के साथ डिजिटल स्पेस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। आने वाले समय में Meta की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।