UPI Transaction Charge: भारत में UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर भविष्य में शुल्क लगने की संभावना को लेकर बहस तेज हो गई है। संसद में पेश एक विधेयक में मौजूदा भुगतान व्यवस्था से जुड़े कानूनी प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव है। इस मुद्दे को भारत-अमेरिका ट्रेड डील और डिजिटल पेमेंट सेक्टर में समान अवसर की अमेरिकी मांग से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि MDR को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
भारत में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदलने में UPI की सबसे बड़ी भूमिका रही है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसकी लोकप्रियता की एक प्रमुख वजह आसान और फिलहाल बिना ट्रांजैक्शन शुल्क के भुगतान की सुविधा है। अब UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर शुल्क की संभावना को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
मामला ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका लंबे समय से भारत की कुछ डिजिटल पेमेंट नीतियों को लेकर सवाल उठाता रहा है और विदेशी पेमेंट कंपनियों के लिए समान अवसर की मांग करता रहा है।
UPI और RuPay को लेकर अमेरिका की क्या आपत्ति है?
भारत में वर्ष 2016 में UPI की शुरुआत हुई थी। इसके बाद डिजिटल भुगतान में तेजी से बदलाव आया और बड़ी संख्या में उपभोक्ता कार्ड के बजाय UPI के जरिए भुगतान करने लगे। इससे अमेरिकी कार्ड नेटवर्क Visa और Mastercard के संभावित कारोबार और फीस से होने वाली आय पर असर पड़ने की चर्चा भी होती रही है।
दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक अमेरिकी कंपनियों की आपत्तियों में UPI और RuPay पर जीरो ट्रांजैक्शन चार्ज, सरकार द्वारा RuPay को बढ़ावा देना और UPI आधारित क्रेडिट भुगतान में RuPay को मिली शुरुआती बढ़त जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।
Visa और Mastercard का बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से ट्रांजैक्शन फीस पर आधारित है। इसमें बैंक, पेमेंट प्रोसेसर और कार्ड नेटवर्क मर्चेंट से होने वाले लेनदेन पर शुल्क कमाते हैं। इसके उलट UPI का जीरो MDR मॉडल इस तरह की फीस से होने वाली कमाई को सीमित करता है।
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो भुगतान प्रोसेस करने के बदले मर्चेंट से लिया जाता है। इस रकम का इस्तेमाल ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग, सेटलमेंट और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी लागत को पूरा करने में किया जाता है।
USTR ने भारत की नीतियों पर उठाए थे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 में यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने भारत की कुछ डिजिटल पेमेंट नीतियों को विदेशी व्यापार में बाधा के रूप में चिह्नित किया था। अमेरिका की चिंता यह रही है कि उसकी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट कंपनियों को भारतीय डिजिटल पेमेंट बाजार में घरेलू कंपनियों के बराबर अवसर नहीं मिल रहे हैं।
खास तौर पर UPI के जरिए होने वाले क्रेडिट ट्रांजैक्शन में RuPay की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। RuPay भारत का घरेलू कार्ड नेटवर्क है और पिछले कुछ वर्षों में इसकी पहुंच तेजी से बढ़ी है।
NPCI ने नवंबर 2020 में UPI के थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स के लिए 30 प्रतिशत मार्केट शेयर की सीमा का ऐलान किया था। इसे पहले जनवरी 2023 से लागू किया जाना था, लेकिन समयसीमा कई बार आगे बढ़ाई गई और अब इसकी मौजूदा डेडलाइन दिसंबर 2026 है।
USTR के मुताबिक 31 दिसंबर 2025 तक अमेरिका के स्वामित्व वाली PhonePe और Google Pay मिलकर भारत में 80 प्रतिशत से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर रही थीं।
संसद में पेश बिल से क्यों बढ़ी चर्चा?
UPI और RuPay पर शुल्क की बहस के बीच संसद में Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पेश किया गया है। इसमें Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव बताया गया है।
इसी संशोधन को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या भविष्य में बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर शुल्क लगा सकेंगे।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 6 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि इस कानूनी बदलाव के पीछे अमेरिका का दबाव है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि MDR व्यापारियों यानी मर्चेंट पर लागू होता है, ग्राहकों या अंतिम उपभोक्ताओं पर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
वित्त मंत्री के मुताबिक आगे की प्रक्रिया संसद द्वारा संबंधित संशोधन विधेयक पारित किए जाने के बाद ही होगी। ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि आम UPI यूजर्स से सीधे ट्रांजैक्शन फीस वसूली जाएगी।
हालांकि यदि भविष्य में मर्चेंट पर किसी तरह का शुल्क लगाया जाता है, तो यह सवाल जरूर रहेगा कि कारोबारी इसकी लागत खुद वहन करेंगे या किसी रूप में इसका बोझ ग्राहकों तक पहुंचेगा।
Visa-Mastercard के लिए क्यों अहम है भारतीय बाजार?
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल है। UPI की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता ने पारंपरिक कार्ड पेमेंट नेटवर्क के सामने नई चुनौती खड़ी की है।
UPI के जरिए बैंक खाते से सीधे भुगतान किया जा सकता है और सामान्य लेनदेन पर उपभोक्ताओं को अलग से ट्रांजैक्शन फीस नहीं देनी पड़ती। यही वजह है कि छोटी रकम के भुगतान में भी UPI का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने लगा है।
वहीं Visa और Mastercard जैसे नेटवर्क की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कार्ड आधारित ट्रांजैक्शन से जुड़ी फीस से आता है। ऐसे में UPI और RuPay का विस्तार उनके लिए कारोबारी प्रतिस्पर्धा का मुद्दा बनता जा रहा है।
सिर्फ भारत नहीं, दूसरे देशों से भी अमेरिका का विवाद
डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर अमेरिका की आपत्ति केवल भारत तक सीमित नहीं है। ब्राजील के कम लागत वाले इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम Pix को लेकर भी अमेरिकी पक्ष ने सवाल उठाए हैं।
USTR का कहना रहा है कि ब्राजील का केंद्रीय बैंक Pix का निर्माता होने के साथ उसका संचालक और नियामक भी है। अमेरिकी कंपनियों ने इसे लेकर चिंता जताई है कि घरेलू भुगतान व्यवस्था को मिलने वाली सुविधाओं से विदेशी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो सकती है।
इसी तरह इंडोनेशिया के National Payment Gateway और खाड़ी सहयोग परिषद के कुछ सदस्य देशों की घरेलू कार्ड एवं डिजिटल पेमेंट नीतियों पर भी अमेरिका आपत्ति जता चुका है।
क्या आम लोगों से वसूला जाएगा UPI चार्ज?
फिलहाल आम UPI यूजर्स से ट्रांजैक्शन चार्ज वसूलने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि जिस MDR की चर्चा हो रही है, वह मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है, सीधे ग्राहक से लिया जाने वाला चार्ज नहीं।
इसके बावजूद प्रस्तावित कानूनी बदलाव ने भविष्य में UPI और RuPay के जीरो-फीस मॉडल को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि संसद में प्रस्तावित संशोधन किस स्वरूप में पारित होता है और भारत-अमेरिका ट्रेड डील में डिजिटल पेमेंट को लेकर क्या सहमति बनती है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि UPI और RuPay की मौजूदा जीरो-फीस व्यवस्था जारी रहती है या इसमें किसी तरह का बदलाव किया जाता है।