KNEWS DESK- हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी व्रत रखा जाता है, लेकिन सावन के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इस बार कामिका एकादशी और भी खास होने वाली है, क्योंकि इस दिन द्विपुष्कर योग समेत कई शुभ संयोग बन रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधि-विधान से आराधना करने से पापों से मुक्ति और श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है। वहीं सावन का महीना होने के कारण इस दिन भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने की भी परंपरा है।
कामिका एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी। एकादशी तिथि का समापन 9 अगस्त को सुबह 11 बजकर 4 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए कामिका एकादशी का व्रत रविवार, 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन यानी 10 अगस्त 2026 को पारण कर सकेंगे। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार पारण के लिए सुबह 5:47 बजे से 8:00 बजे तक का समय शुभ बताया गया है।
द्विपुष्कर योग बढ़ाएगा एकादशी का महत्व
इस बार कामिका एकादशी पर द्विपुष्कर योग का संयोग बनना इसकी विशेषताओं में शामिल है। दिए गए पंचांग विवरण के मुताबिक 9 अगस्त को सुबह 11:04 बजे से दोपहर 2:43 बजे तक द्विपुष्कर योग रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में द्विपुष्कर योग को विशेष माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस योग में किए गए कुछ कार्यों की पुनरावृत्ति होती है या उनका प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए शुभ कार्य चुनते समय स्थानीय पंचांग और विद्वान की सलाह लेने की परंपरा भी है। इसके अलावा मृगशिरा नक्षत्र और हर्षण योग का संयोग भी इस दिन के धार्मिक महत्व को बढ़ा रहा है।
विष्णु के साथ महादेव की पूजा का संयोग
कामिका एकादशी सावन में पड़ने के कारण श्रद्धालुओं के लिए भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की आराधना का भी अवसर है। एक ओर एकादशी पर श्रीहरि विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है, तो दूसरी ओर सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करने और रुद्राभिषेक करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प और फल अर्पित कर सकते हैं। वहीं भगवान शिव को जल अर्पित कर महामृत्युंजय मंत्र या शिव मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
कामिका एकादशी की पूजा कैसे करें?
कामिका एकादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान की सफाई कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। श्रीहरि को पीले फूल, फल, तुलसी दल और सात्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और कामिका एकादशी की कथा का श्रवण किया जा सकता है।
एकादशी की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि परंपरागत मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचा जाता है, इसलिए पूजा के लिए तुलसी दल पहले से रखे जा सकते हैं।
कामिका एकादशी से जुड़ी पौराणिक मान्यता
कामिका एकादशी से जुड़ी अलग-अलग धार्मिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें इस व्रत को मनुष्य के पापों का नाश करने वाला और भगवान विष्णु की कृपा दिलाने वाला बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ कामिका एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन दान-पुण्य और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी शुभ माना जाता है।
कामिका एकादशी पर क्या करें?
इस दिन व्रती को सात्विक आचरण रखने, भगवान विष्णु का स्मरण करने और यथासंभव क्रोध, झूठ तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह धार्मिक परंपराओं में दी जाती है। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और जरूरतमंदों को दान किया जा सकता है। सावन होने के कारण श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक भी कर सकते हैं। इस तरह कामिका एकादशी पर हरि और हर—भगवान विष्णु और भगवान शिव—दोनों की उपासना का विशेष संयोग बन रहा है।
कामिका एकादशी का महत्व
सनातन परंपरा में कामिका एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी व्रतों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने से श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है और साधक को आध्यात्मिक शांति मिलती है। सावन, एकादशी और शुभ योगों के संयोग के कारण 9 अगस्त 2026 की कामिका एकादशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष मानी जा रही है।