सुबह से लड्डू बना रहे थे BJP समर्थक, बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने पलटा चुनावी खेल

KNEWS DESK- बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। सोमवार सुबह मतगणना शुरू होने से पहले बीजेपी समर्थकों को अपने उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा की जीत का पूरा भरोसा दिखाई दे रहा था। पटना में कार्यकर्ता बड़ी मात्रा में लड्डू तैयार करते नजर आए, लेकिन जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ी, तस्वीर बदलती चली गई। जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कई राउंड की मतगणना के बाद मजबूत बढ़त बनाकर बीजेपी की चिंता बढ़ा दी।

बांकीपुर को लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यह सीट नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद खाली हुई थी। नितिन नवीन ने लंबे समय तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। ऐसे में बीजेपी को उम्मीद थी कि उपचुनाव में भी पार्टी आसानी से अपनी पकड़ बरकरार रखेगी। हालांकि पहली बार खुद चुनाव मैदान में उतरे प्रशांत किशोर ने मुकाबले का पूरा गणित बदल दिया।

कम वोटिंग ने बढ़ाई BJP की मुश्किल?

बांकीपुर उपचुनाव में करीब 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कम मतदान को लेकर शुरुआत से ही कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही थीं। खासतौर पर सवाल था कि क्या बीजेपी अपने पारंपरिक मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने में सफल रही है।

मतगणना के रुझानों ने इन सवालों को और मजबूत कर दिया। बीजेपी के लिए चुनौती केवल कम मतदान नहीं रही, बल्कि उसके पारंपरिक वोट बैंक में संभावित सेंध भी चुनावी समीकरण बदलने वाला बड़ा फैक्टर मानी जा रही है।

खुद मैदान में उतरे PK तो बदल गया मुकाबला

प्रशांत किशोर का खुद चुनाव लड़ना इस मुकाबले का सबसे अहम पहलू रहा। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने बड़े पैमाने पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी अपना खाता खोलने में सफल नहीं हुई थी। इसके बाद बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने किसी दूसरे नेता को उम्मीदवार बनाने के बजाय खुद मैदान में उतरने का फैसला किया।

चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव सीधे तौर पर उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता की परीक्षा बन गया। दूसरी ओर बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया। नतीजों के रुझानों में प्रशांत किशोर की बढ़त ने यह संकेत दिया कि उनकी व्यक्तिगत पहचान और चुनावी रणनीति ने मुकाबले पर बड़ा असर डाला।

BJP के गढ़ में बदलाव का मूड?

बांकीपुर को बीजेपी का पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है। इसके बावजूद इस बार मतदाताओं के एक हिस्से में बदलाव की इच्छा को प्रशांत किशोर की बढ़त की वजह माना जा रहा है।

प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने बीजेपी के ‘गढ़’ वाले दावे को भी चुनौती दी। उन्होंने चुनाव को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कामकाज से जोड़ते हुए जनता से वोट मांगे। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय समस्याओं को अपने अभियान के केंद्र में रखा।

जातीय समीकरण में भी PK ने लगाई सेंध

बांकीपुर के चुनावी नतीजों में जातीय समीकरण की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक के कुछ हिस्सों का झुकाव प्रशांत किशोर की ओर होने की संभावना जताई जा रही है।

माना जा रहा है कि कायस्थ समुदाय का बड़ा हिस्सा बीजेपी के साथ रहा, लेकिन कुछ अन्य सवर्ण और ओबीसी मतदाताओं ने जन सुराज की ओर रुख किया। इसी तरह आरजेडी के पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण में भी संभावित टूट को प्रशांत किशोर के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। हालांकि मतदाताओं के जाति-वार आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं होते, इसलिए इन समीकरणों को चुनावी रुझानों और राजनीतिक विश्लेषण के तौर पर ही देखा जा रहा है।

शिक्षा और रोजगार पर टिका रहा PK का प्रचार

प्रशांत किशोर ने अपने प्रचार अभियान में जाति और धर्म के बजाय शिक्षा, रोजगार और नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनकी रणनीति बड़े शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सीधे मतदाताओं तक पहुंचने की रही।

मोहल्ला बैठकों और पब्लिक इंटरेक्शन के जरिए जन सुराज ने अलग-अलग इलाकों में मतदाताओं से संपर्क साधा। प्रशांत किशोर ने स्थानीय समस्याओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया। माना जा रहा है कि इस रणनीति ने खासकर बदलाव चाहने वाले मतदाताओं को प्रभावित किया।

BJP की रणनीति पर उठे सवाल

बीजेपी के चुनाव प्रचार में नितिन नवीन ने बांकीपुर के साथ अपने पुराने और भावनात्मक रिश्ते पर जोर दिया। हालांकि प्रशांत किशोर ने स्थानीय स्तर पर आक्रामक प्रचार और सीधे जनसंपर्क के जरिए बीजेपी को चुनौती दी।

स्थानीय इकाई के भीतर कथित मतभेद और कम मतदान भी बीजेपी के लिए मुश्किल पैदा करने वाले कारण माने जा रहे हैं। वहीं प्रशांत किशोर ने बीजेपी और आरजेडी दोनों के वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति अपनाई।

मतगणना से पहले बीजेपी समर्थकों ने जीत की उम्मीद में लड्डू तैयार किए थे, लेकिन रुझानों ने मुकाबले की तस्वीर बदल दी। अगर प्रशांत किशोर की बढ़त अंतिम नतीजे तक कायम रहती है, तो बांकीपुर का परिणाम सिर्फ एक विधानसभा सीट की हार-जीत तक सीमित नहीं रहेगा। यह जन सुराज और प्रशांत किशोर की बिहार की राजनीति में आगे की भूमिका के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाएगा।

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