पेपर लीक बिल पर जितेंद्र सिंह का विपक्ष पर हमला, बोले- ‘आपके अधूरे काम मोदी सरकार ने पूरे किए’

KNEWS DESK – लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए।

‘युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे’: जितेंद्र सिंह

लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट संदेश है कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा, इसलिए यह विधेयक संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कानून साबित होगा।

UPA सरकार के दौरान हुए पेपर लीक का किया जिक्र

जितेंद्र सिंह ने अपने भाषण में कहा कि पेपर लीक की घटनाएं नई नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी कई बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए थे।

उन्होंने उदाहरण देते हुए रेलवे भर्ती बोर्ड (2009), ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम (2011), AIIMS प्रवेश परीक्षा (2012), महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा (2013), उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा और तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन सहित कई मामलों का उल्लेख किया।

मंत्री ने कहा कि यदि वह सभी घटनाओं की सूची पढ़ने लगें तो पूरे समय उसी में निकल जाएगा। उनका कहना था कि इन्हीं अनुभवों को देखते हुए सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए अलग कानून बनाने का फैसला किया।

NTA को लेकर सरकार का पक्ष

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन वर्ष 2017 में इसी सरकार ने किया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश 1992 और फिर 2010 में भी की गई थी, लेकिन उस समय की सरकारें इसे लागू नहीं कर सकीं।

उनके मुताबिक, वर्तमान सरकार ने वर्षों से लंबित इस व्यवस्था को लागू कर छात्रों के लिए एक बेहतर परीक्षा प्रणाली तैयार करने का प्रयास किया है।

गौरव गोगोई ने सरकार पर उठाए सवाल

विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार की मंशा और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि 2024 का कानून इतना प्रभावी था, तो उसके बाद भी पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है और संशोधन विधेयक केवल दिखावे की कवायद है। गोगोई ने NTA के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि परीक्षा विवादों के बावजूद एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

छात्रों पर कार्रवाई को लेकर भी सरकार घिरी

गौरव गोगोई ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और कई छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ।

उन्होंने गृह मंत्रालय से जवाब मांगते हुए पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़ने का आदेश किसने दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से कई छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए।

विधेयक पर जारी रहेगी चर्चा

पेपर लीक रोकने के उद्देश्य से लाए गए इस संशोधन विधेयक पर लोकसभा में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। एक ओर सरकार इसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष कानून की प्रभावशीलता और परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस विधेयक पर संसद में और भी विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *