KNEWS DESK- लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बिल पेश करते हुए कहा कि पेपर लीक कोई नई समस्या नहीं है और पिछली सरकारों के दौरान भी कई बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए थे। वहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल कानून सख्त करने से समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि पहले भी कानून मौजूद था, फिर भी पेपर लीक की घटनाएं होती रहीं।
चर्चा की शुरुआत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2009 में रेलवे भर्ती परीक्षा और 2012 में दिल्ली एम्स परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक किसी एक राज्य की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की चुनौती है, इसलिए इससे निपटने के लिए कड़े कानून और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि संशोधन बिल में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को और कठोर बनाया गया है। नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक में शामिल दोषियों को अब कम से कम 5 से 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा। वहीं, परीक्षा आयोजित करने वाले सर्विस प्रोवाइडर्स पर अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा और उन्हें 8 साल तक परीक्षा कराने से प्रतिबंधित किया जा सकेगा। इसके अलावा, संगठित अपराध या माफिया गिरोह के मामलों में सजा 7 से 10 साल तक की जा सकेगी और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।
वहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संशोधन केवल दिखावा है। उन्होंने कहा कि 2024 में भी सरकार इसी कानून को ऐतिहासिक बताकर लाई थी, लेकिन उसके बाद भी पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं। गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है और छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल कानून में संशोधन कर रही है। उन्होंने कहा कि NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और अब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल पाया है। गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जवाबदेही तय करने से बच रही है और छात्रों की परेशानियों को गंभीरता से नहीं ले रही।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा विवादों के कारण छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र घरवालों को बताए बिना दिल्ली पहुंचकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उनका कहना था कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए केवल सख्त कानून नहीं, बल्कि प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था की भी जरूरत है। लोकसभा में बिल पर चर्चा जारी है। सरकार का कहना है कि संशोधन कानून से परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और पेपर लीक पर लगाम लगेगी, जबकि विपक्ष का आरोप है कि कानून से ज्यादा जरूरी उसकी प्रभावी और ईमानदार क्रियान्वयन व्यवस्था है।