Knews Desk– भारत में अमीरों और करोड़पतियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनके निवेश और संपत्ति का प्रबंधन करने वाले अनुभवी वेल्थ मैनेजरों (Wealth Managers) की भारी कमी सामने आ रही है। यही वजह है कि बैंक और वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियां अनुभवी रिलेशनशिप मैनेजरों (Relationship Managers) को आकर्षित करने के लिए 20 से 40 फीसदी तक की सैलरी बढ़ोतरी और आकर्षक बोनस ऑफर कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह मांग और भी बढ़ सकती है, क्योंकि देश में हाई नेटवर्थ और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत में 3 करोड़ डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) से अधिक की संपत्ति रखने वाले लोगों की संख्या में करीब 63 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2021 में ऐसे लोगों की संख्या लगभग 12,161 थी, जो 2026 तक बढ़कर करीब 19,877 हो गई है। अनुमान है कि 2031 तक यह आंकड़ा 25 हजार के पार पहुंच सकता है। अकेले मुंबई में देश के एक-तिहाई से अधिक अल्ट्रा-रिच लोग रहते हैं। हालांकि, इतनी तेजी से बढ़ती संपत्ति को संभालने के लिए प्रशिक्षित और अनुभवी विशेषज्ञों की संख्या बेहद सीमित है।
फिलहाल देश में ऐसे अनुभवी रिलेशनशिप मैनेजरों की संख्या करीब 1,900 बताई जाती है। अनुमान है कि 2028 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 2,800 हो सकती है, लेकिन तब भी मांग के मुकाबले यह काफी कम रहेगी। एक अनुभवी वेल्थ मैनेजर को भविष्य में औसतन 4.8 अरब रुपये तक की संपत्ति संभालनी पड़ सकती है। ऐसे में कंपनियों के लिए योग्य और भरोसेमंद पेशेवरों की तलाश बड़ी चुनौती बनती जा रही है।इस कमी का सबसे बड़ा फायदा मौजूदा वेल्थ मैनेजरों को मिल रहा है। वित्तीय संस्थान और निजी वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियां एक-दूसरे के कर्मचारियों को बेहतर पैकेज देकर अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। कई कंपनियां 20 से 40 फीसदी तक का वेतन बढ़ाने के साथ-साथ कई वर्षों का गारंटीड बोनस भी ऑफर कर रही हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि किसी नए व्यक्ति को इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रशिक्षित करने में लगभग 18 से 24 महीने का समय लग जाता है। इसलिए कंपनियां अनुभवी पेशेवरों को सीधे नियुक्त करना ज्यादा बेहतर मान रही हैं।
भारत का वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन विकसित देशों की तुलना में अभी शुरुआती चरण में है। अमेरिका में करीब 75 फीसदी संपत्ति का प्रबंधन पेशेवर वेल्थ मैनेजर करते हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा केवल 15 फीसदी के आसपास है। अभी भी देश के लगभग 35 से 40 फीसदी संपन्न परिवार अपनी संपत्ति का प्रबंधन स्वयं करते हैं। हालांकि, नई पीढ़ी के निवेशकों की बदलती सोच के कारण यह तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दस वर्षों में भारत में करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के हाथों में जाएगी। इसके साथ ही निवेश के तरीके भी बदल रहे हैं। अब अमीर निवेशक केवल शेयर और म्यूचुअल फंड तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि प्राइवेट इक्विटी, वैकल्पिक निवेश और विदेशी बाजारों में भी अवसर तलाश रहे हैं। ऐसे निवेशों के लिए विशेषज्ञ सलाह और पेशेवर वेल्थ मैनेजमेंट की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रही हैं। AI की मदद से रिसर्च, डेटा एनालिसिस और निवेश संबंधी कई प्रक्रियाएं तेज और आसान हो रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अल्ट्रा-रिच ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत भरोसा और संबंध सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए तकनीक वेल्थ मैनेजरों की कार्यक्षमता बढ़ा सकती है, लेकिन उनकी जगह पूरी तरह नहीं ले सकती।भारत की बढ़ती संपन्नता और निवेश संस्कृति आने वाले वर्षों में वेल्थ मैनेजमेंट उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। लेकिन इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत ऐसे प्रशिक्षित और अनुभवी पेशेवरों की होगी, जो करोड़ों और अरबों रुपये की संपत्ति को सही रणनीति के साथ सुरक्षित और लाभदायक तरीके से प्रबंधित कर सकें।