KNEWS DESK- पेपर लीक मामलों पर देशभर में जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026′ पेश किया। हालांकि विपक्ष के हंगामे के कारण इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी। सरकार ने विपक्ष पर छात्रों से जुड़े अहम मुद्दे पर बहस से बचने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगता रहा।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। उस समय विपक्षी सांसद नारेबाजी कर रहे थे और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा रहे थे। लगातार हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या पर सख्त कानून लाना चाहती है, लेकिन विपक्ष चर्चा में भाग लेने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे छात्रों के हित में संसद में खुली बहस में शामिल हों।
सरकार के अनुसार, संशोधन विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर पहले से अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की जेल तथा 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं संगठित अपराध के मामलों में 7 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाए। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रावधान किया गया है, ताकि चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमों का निपटारा हो सके।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह इस विधेयक को जल्द पारित कराना चाहती है। इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं से चर्चा कर सहमति बनाने की कोशिश की है। यदि विपक्ष सहयोग नहीं करता, तो सरकार संसदीय प्रक्रिया के तहत विधेयक को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी।