Diet Coke हुई महंगी! भारत में 10% से ज्यादा बढ़ी कीमत, जानिए इसके पीछे की वजह

KNEWS DESK- अगर आप डाइट कोक पीना पसंद करते हैं, तो अब इसके लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के चलते Coca-Cola ने भारत में Diet Coke की कीमत बढ़ा दी है। कंपनी अब पहले की तुलना में बड़े एल्युमिनियम कैन का इस्तेमाल कर रही है, जिससे उत्पाद की लागत बढ़ गई है और इसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ा है।

जानकारी के मुताबिक, मध्य पूर्व में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ रहे असर के कारण एल्युमिनियम कैन की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत में इस्तेमाल होने वाले छोटे कैन की उपलब्धता कम होने से कंपनी को दूसरे देशों से बड़े और महंगे कैन मंगाने पड़ रहे हैं। बढ़ी हुई लागत के कारण कंपनी ने कीमतों में इजाफा किया है।

अब मिलेगा बड़ा कैन, लेकिन ज्यादा कीमत पर

पहले भारत में 300 मिलीलीटर का Diet Coke कैन 40 रुपये में उपलब्ध था। अब इसकी जगह 330 मिलीलीटर का कैन 50 रुपये में बेचा जा रहा है। हालांकि ग्राहकों को 30 मिलीलीटर अतिरिक्त ड्रिंक मिल रही है, लेकिन प्रति मिलीलीटर कीमत के हिसाब से यह पहले की तुलना में करीब 13 प्रतिशत से अधिक महंगा पड़ रहा है।

फिलहाल Coca-Cola की ओर से इस कीमत बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कंपनी ने इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी भी नहीं की है। हालांकि बाजार में नए दाम लागू होने लगे हैं। सप्लाई बनाए रखने के लिए कंपनी के एक बॉटलिंग पार्टनर ने सीमित अवधि के लिए 200 मिलीलीटर की कांच की बोतल में भी Diet Coke की बिक्री शुरू की है। हालांकि इसकी कीमत कैन वाले विकल्प के मुकाबले अधिक बताई जा रही है।

भारत में लगातार बढ़ रही है डिमांड

भारत Coca-Cola के लिए तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच Diet Coke की मांग पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। हालांकि, कंपनी का दूसरा शुगर-फ्री ब्रांड Coke Zero फिलहाल इस समस्या से ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है क्योंकि वह प्लास्टिक बोतलों और कैन दोनों में उपलब्ध है।

बाजार में कमी से बढ़ा आकर्षण

Diet Coke की सीमित उपलब्धता का असर केवल रिटेल बाजार तक ही सीमित नहीं रहा। कई कैफे, पब और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने इसकी बढ़ती मांग का फायदा उठाते हुए विशेष इवेंट और प्रमोशनल कैंपेन भी शुरू किए। इससे यह साफ है कि वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं का असर अब रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों और उपलब्धता पर भी पड़ने लगा है.

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