AI साइबर अटैक से बचाव के लिए बैंकों का बड़ा प्लान, 25 टेक कंपनियों के साथ बनाई रणनीति

Knews Desk– आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध भी तेजी से विकसित हो रहे हैं. अब हैकर्स पारंपरिक तरीकों के बजाय AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर बैंकिंग सिस्टम पर अधिक जटिल और खतरनाक हमले करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी खतरे को देखते हुए भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जानकारी के मुताबिक, देश के बैंकों ने 25 ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) की पहचान की है, जिनके साथ मिलकर AI से जुड़े साइबर जोखिमों को कम करने और सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने पर काम किया जाएगा.

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने AI आधारित साइबर खतरों को देश के वित्तीय क्षेत्र के लिए सबसे बड़े प्रणालीगत जोखिमों में शामिल किया है. बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मदद से साइबर अपराधी फिशिंग, डेटा चोरी, फर्जी पहचान और नेटवर्क में सेंध लगाने जैसी गतिविधियों को पहले से अधिक तेजी और सटीकता के साथ अंजाम दे सकते हैं. ऐसे में केवल पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपाय अब पर्याप्त नहीं रह गए हैं.सूत्रों के अनुसार, जिन 25 OEMs की पहचान की गई है, उनके सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और एप्लिकेशन पहले से ही कई बैंकों में उपयोग किए जा रहे हैं. इन कंपनियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बैंकिंग सिस्टम में मौजूद संभावित तकनीकी कमजोरियों की समय रहते पहचान हो और उन्हें दूर किया जा सके. इसके साथ ही AI आधारित सुरक्षा समाधान भी विकसित किए जाएंगे, जो संभावित साइबर हमलों का पहले से अनुमान लगाकर उन्हें रोकने में मदद करेंगे.

इस दिशा में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई में एक विशेष वर्किंग ग्रुप भी काम कर रहा है. इस समूह में वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI), भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) और नौ प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हैं. यह समूह एक व्यापक सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है, जिससे बैंक अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बना सकें तथा AI से जुड़े जोखिमों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठा सकें.बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों का कहना है कि सभी बैंकों को अपने नेटवर्क के “अटैक सरफेस” को कम करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके तहत डिफेंसिव AI एजेंट्स की तैनाती, नेटवर्क की लगातार निगरानी, नियमित सिक्योरिटी ऑडिट और सुरक्षा उपायों की समय-समय पर समीक्षा जैसी रणनीतियों पर काम किया जा रहा है. इन उपायों का उद्देश्य किसी भी साइबर हमले का शुरुआती चरण में ही पता लगाना और उसे प्रभावी तरीके से रोकना है.

हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग मैनेजमेंट (NIBM) द्वारा जारी एक वर्किंग पेपर में भी चेतावनी दी गई थी कि किसी बैंक के आंतरिक सुरक्षा नियंत्रण मजबूत होने के बावजूद उसकी सप्लाई चेन सबसे बड़ी कमजोरी बन सकती है. यदि कोई कमजोर वेंडर, फिनटेक पार्टनर या क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर साइबर हमले का शिकार होता है, तो उसका असर सीधे बैंकिंग सिस्टम पर भी पड़ सकता है.रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई बार बैंकों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर में कौन-कौन से ओपन सोर्स कंपोनेंट, AI से तैयार किया गया कोड या थर्ड पार्टी लाइब्रेरी शामिल हैं. यदि इनमें कोई सुरक्षा खामी मौजूद हो, तो वही कमजोरी एक साथ कई बैंकों और संस्थानों को प्रभावित कर सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में AI आधारित साइबर हमलों की संख्या और जटिलता दोनों बढ़ेंगी. ऐसे में तकनीक के साथ-साथ मजबूत निगरानी, सहयोग और समय पर सुरक्षा अपडेट ही बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित रखने की सबसे प्रभावी रणनीति साबित होगी.

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