KNEWS DESK- सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इनमें भी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह की योगनिद्रा के लिए जाते हैं। इस कारण देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है।
मान्यता है कि भगवान विष्णु के शयन काल शुरू होने से पहले तुलसी माता की पूजा करने और उनके समीप दीपक जलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इससे घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक खुशहाली बनी रहती है।
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई, शनिवार को रखा जाएगा। यह तिथि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी पर पुनः जागृत होते हैं। चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य कई मांगलिक कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य को विशेष महत्व दिया गया है।
तुलसी पूजा का क्यों है विशेष महत्व?
हिंदू धर्म में तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की सबसे प्रिय माना गया है। यही कारण है कि विष्णु पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी माता की विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि इससे घर में आर्थिक सुख-समृद्धि बढ़ती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
तुलसी के पास दीपक जलाने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी की संध्या बेला में तुलसी के पौधे के समीप दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। कहा जाता है कि तुलसी के सामने प्रज्ज्वलित दीपक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है, जिससे घर में धन, वैभव और खुशहाली का वास बना रहता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार घी या तिल के तेल का दीपक जला सकते हैं।
ऐसे करें देवशयनी एकादशी पर तुलसी पूजन
देवशयनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और तुलसी के पौधे के आसपास की जगह को साफ करें। तुलसी माता को जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। पूजन के दौरान तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा शांति की कामना करें। शाम के समय पुनः तुलसी के पास दीपदान करना भी शुभ माना गया है।
चातुर्मास के साथ शुरू होता है विशेष साधना काल
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ होता है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक माह आते हैं। इन चार महीनों में भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास में किए गए व्रत, जप, तप और दान का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इसलिए श्रद्धालु इस अवधि को आध्यात्मिक साधना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व देते हैं।