Knews Desk– कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज 23 जुलाई से स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में होने जा रहा है। एक बार फिर दुनिया के कई देशों के खिलाड़ी इस प्रतिष्ठित मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। भारत भी बड़ी उम्मीदों के साथ इन खेलों में उतर रहा है। लेकिन जब भी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उपलब्धियों की बात होती है, तो सबसे पहले उस ऐतिहासिक पल का जिक्र जरूर होता है, जब महान धावक मिल्खा सिंह ने देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाकर इतिहास रच दिया था।
भारत ने पहली बार 1934 के लंदन कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था। उसी संस्करण में पहलवान राशिद अनवर ने कुश्ती में सिल्वर मेडल जीतकर भारत का पदक खाता खोला था। हालांकि, देश को गोल्ड मेडल का इंतजार लंबा करना पड़ा। यह इंतजार पूरे 24 साल तक चला और आखिरकार 1958 में कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स में खत्म हुआ।1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिल्खा सिंह ने 440 गज (लगभग 400 मीटर) की दौड़ में हिस्सा लिया। उस समय इस स्पर्धा में दुनिया के कई बेहतरीन धावक मौजूद थे। फाइनल मुकाबले में मिल्खा सिंह ने शानदार शुरुआत की और पूरी रेस के दौरान अपनी रफ्तार बनाए रखी। उन्होंने 46.71 सेकंड में रेस पूरी कर पहला स्थान हासिल किया। इस दौरान उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज धावक मैलकम क्लाइव स्पेंस को पीछे छोड़ दिया और भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
यह जीत सिर्फ एक गोल्ड मेडल नहीं थी, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक नई शुरुआत थी। कार्डिफ में जब भारतीय तिरंगा लहराया गया और राष्ट्रगान बजा, तो यह पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था। मिल्खा सिंह की इस सफलता ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिताओं में भी बड़ी ताकत बन सकता है।मिल्खा सिंह को उनकी तेज रफ्तार के कारण ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से जाना जाता था। उनका जन्म 20 नवंबर 1929 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के गोविंदपुरा गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। विभाजन के दौरान उन्होंने अपने परिवार को खो दिया, लेकिन कठिन परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।
कॉमनवेल्थ गेम्स के अलावा मिल्खा सिंह ने एशियाई खेलों में भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1958 और 1962 एशियन गेम्स में कुल चार स्वर्ण पदक जीते। इसके अलावा 1960 के रोम ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ में चौथा स्थान हासिल किया, जो उस समय भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई।भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। 1934 से लेकर 2022 तक भारत कुल 564 पदक जीत चुका है, जिनमें 203 स्वर्ण, 190 रजत और 171 कांस्य पदक शामिल हैं। अब ग्लासगो 2026 में भारतीय खिलाड़ी इस शानदार विरासत को आगे बढ़ाने के इरादे से मैदान में उतरेंगे। वहीं, मिल्खा सिंह की ऐतिहासिक जीत आज भी हर भारतीय खिलाड़ी के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बनी हुई है।